पिछले कुछ समय से मणिपुर में जिस तरह हालात थोड़े काबू में दिख रहे हैं, उसके मद्देनजर यह उम्मीद स्वाभाविक है कि अब शायद वहां शांति और स्थिरता लौट सकेगी। मगर बुधवार को एक व्यक्ति की हत्या के बाद फिर से शांति की उम्मीद के धुंधलाने की आशंका खड़ी हो गई है। गौरतलब है कि मणिपुर के अशांत चुराचांदपुर जिले में कुछ संदिग्ध उग्रवादियों ने मैतेई समुदाय के एक व्यक्ति को अगवा कर लिया, फिर गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उस इलाके में तनाव फिर बढ़ गया। गुरुवार को हत्या के विरोध में काकचिंग खुन्नौ लामखाई क्षेत्र में लोगों ने उग्र प्रदर्शन किया और वाहनों की आवाजाही बाधित कर दी। जाहिर है, काफी जद्दोजहद के बाद राज्य में जो हालात थोड़े नियंत्रण में आते दिख रहे थे, उसके फिर बिगड़ने की स्थिति बन रही है।
खबरों के मुताबिक, काकचिंग जिले के एक मैतेई युवक की शादी चुराचांदपुर की कुकी जनजाति की युवती से हुई थी। स्थानीय समूहों ने युवक को पत्नी के साथ रहने की इजाजत दे दी थी। मगर इसके बाद अचानक ही कुछ लोगों ने अगवा कर युवक की हत्या कर दी। अपहरणकर्ताओं के एक उग्रवादी कुकी समूह से जुड़े होने का संदेह है।
हालांकि इस घटना की जांच का जिम्मा एनआइए को दे दिया गया है और निष्कर्ष आने के बाद ही हकीकत सामने आएगी। मगर हत्या के पीछे उन तत्त्वों का हाथ होने की आशंका है, जो नहीं चाहते कि राज्य में शांति फिर से पटरी पर लौटे। आपस में दो विरोधी समुदायों के युवक-युवती की शादी के बाद जब स्थानीय समूहों ने दोनों को साथ रहने की अनुमति दे दी थी, तो यह पहल सामुदायिक स्तर पर भी सद्भाव की वापसी की एक कड़ी बन सकती थी। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच सहमति आधारित समाधान की राह की तलाश करने में मदद मिल सकती थी। मगर वे कौन लोग हैं, जिन्हें इस पर आपत्ति हुई और उन्होंने अपहरण करके युवक की हत्या कर दी?
साफ है कि इस घटना को अंजाम देने वालों का मकसद फिर से दोनों समुदायों के बीच अशांति और हिंसा को भड़काना है। निश्चित रूप से एक व्यक्ति की हत्या भी बेहद दुखद है, लेकिन फिलहाल जरूरत इस बात की है कि किसी भी घटना को अशांति पैदा करने का कारण न बनने दिया जाए। मणिपुर में मैतेई समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के मसले पर मई, 2023 में कुकी-जो समुदाय के साथ जो टकराव पैदा हुआ था, उसमें अब तक ढाई सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों परिवार बेघर हुए। लगातार हिंसा और अराजकता में पिछले कुछ समय से थोड़ी कमी देखी जा रही है, मगर जमीन पर दोनों समुदायों के बीच विभाजन की स्थिति अभी भी बनी हुई है।
इसे पाटने के लिए सरकार को हर उस पहल का समर्थन करना चाहिए और कुकी तथा मैतेई समुदाय के बीच समझौते की स्थितियों का निर्माण करना चाहिए, जिससे राज्य में शांति कायम हो सके। इस क्रम में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कई कुकी-जो संगठनों के बीच एसओओ यानी ‘सस्पेंशन आफ आपरेशन्स’ समझौता हुआ था, जिसका मकसद उग्रवादी समूहों के साथ राजनीतिक संवाद शुरू करना और हिंसा को समाप्त करना है। मगर अब भी कुछ समूह इससे बाहर हैं। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि मणिपुर में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में जरूर दिख रही है और इसके सहारे शांति की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन इस स्थिति में अगर निरंतरता नहीं बनी रही, तो एक छोटी चिंगारी भी हिंसा की आग को फिर से भड़का सकती है।
