Jharkhand Elephant Attack: देश भर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और वनों के घटते दायरे से मनुष्य और वन्यजीवों के बीच संघर्ष गहराता जा रहा है। जंगलों में मानव गतिविधियों की निरंतरता से सह-अस्तिव से जुड़े प्रकृति के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। इसके नतीजतन भोजन की तलाश में वन्य जीव रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं और जिसकी कीमत न केवल फसलों के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ रही है, बल्कि कई बार लोग उनकी आक्रामकता का भी शिकार हो जाते हैं।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिलेमें मंगलवार रात एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने सामने आई, जिसमें एक जंगली हाथी के हमले में छह लोगों की मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाथी पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में उत्पाद मचा रहा था। इस घटना के बाद वन कर्मी हरकत में आए और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया।

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ऐसे में सवाल है कि वन विभाग ने समय रहते स्थिति की गंभीरता को क्यों नहीं समझा? इन लोगों की मौत के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? यह गंभीर चिंता का विषय है कि न सिर्फ हाथी, बल्कि चीते और तेंदुए जैसे खतरनाक जानवर भी जंगलों से निकल कर अब इंसानी बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। दरअसल, जंगलों के नजदीक अतिक्रमण बढ़ रहा है।

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आसपास बसावट से हाथियों और अन्य वन्य प्राणियों की शांति भंग हो रही है। साथ ही वनों की कटाई से उनके लिए भोजन का संकट भी पैदा हो रहा है। नतीजा यह कि वे अपने ही आवास से बेदखल हो रहे हैं। जंगली हाथियों की बात की जाए तो उनके हमलों में हर वर्ष कई लोगों की जान जा रही है।

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हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल और झारखंड से लेकर असम, तमिलनाडु और केरल तक कई राज्यों में हाथियों के हमले की घटनाएं बढ़ी हैं। मानव से संघर्ष में हाथियों की भी मौत हो रही है। कई बार तो उनके मार्ग में आने वाली रेल पटरियां भी उनकी मौत का सबब बन जाती हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसे सामाजिक और पर्यावरणीय पहलू से देखना होगा। जब तक समस्या की जड़ में नहीं जाएंगे, तब तक मनुष्य और वन्यजीवों के बीच टकराव खत्म नहीं होगा।

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