मैच के दौरान गेंद से छेड़छाड़ के कारण आस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम के कप्तान पद से स्टीव स्मिथ और उपकप्तान पद से डेविड वार्नर को आखिरकार अपने-अपने पद से हटना पड़ा। इस वाकये से आस्ट्रेलियाई क्रिकेट की साख गिरी है। साथ ही, यह घटना पूरे क्रिकेट जगत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। सबसे अफसोसनाक यह है कि गेंद को खराब करने की हरकत के पीछे किसी एक खिलाड़ी की सनक नहीं थी, बल्कि ऐसा सुनियोजित रूप से किया गया, और इसमें टीम का नेतृत्व भी शामिल था। कोच के भी संलिप्त होने की शंका जताई गई है। घटना यह है कि मेजबान दक्षिण अफ्रीका से तीसरे टैस्ट मैच के दौरान आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बेनक्रॉफ्ट ने फील्डिंग करते हुए गेंद से छेड़छाड़ की, ताकि गेंदबाज रिंवर्स स्विंग करा सके। इस शृंखला के अब तक मैचों में रिवर्स स्विंग कारगर साबित हुई है। क्या पता अगले मैच में भी हो। लेकिन बेनक्रॉफ्ट की यह हरकत कैमरे में कैद हो गई, और इसी के साथ विवाद खड़ा हो गया। मामला तूल पकड़ने पर आस्ट्रेलियाई टीम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गलती कबूल करनी पड़ी।
सबूत इतने पक्के थे कि कबूलनामे के सिवा कोई चारा नहीं था। यों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंद से छेड़छाड़ का यह कोई पहला मामला नहीं है। मसलन, 1977 में चेन्नई में खेले गए अंतरराष्ट्रीय मैच में भारतीय टीम के तत्कालीन कप्तान बिशन सिंह बेदी ने इंग्लैंड के गेंदबाज जॉन लेवर पर वेसलीन से गेंद चमकाने का आरोप लगाया था। जांच में आरोप सही पाया गया, पर मामले को दबा दिया गया। ऐसे भी उदाहरण हैं कि दोषी खिलाड़ी पर एकाध मैच का प्रतिबंध और जुर्माना लगा या उसकी मैच फीस में कटौती की गई। आरोप लगने और साबित न हो पाने के उदाहरण भी हैं। क्या पता, कई अन्य मामलों में भी सिर्फ एक खिलाड़ी दोषी न रहा हो। पर ताजा मामले में गेंद से छेड़छाड़ करने वाले खिलाड़ी के अलावा टीम नेतृत्व की संलिप्तता प्रमाणित है। लिहाजा, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने कप्तान स्मिथ को एक मैच के लिए प्रतिबंधित कर दिया और उन पर सौ फीसद मैच फीस का जुर्माना भी लगा दिया। गेंद से छेड़छाड़ करने वाले बेनक्रॉफ्ट की सिर्फ पचहत्तर फीसद फीस काटी गई है। उन पर एक भी मैच का प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया? आइआइसी का रवैया भले नरमी का दिख रहा हो, सीए यानी क्रिकेट आस्ट्रेलिया और एएससी यानी आस्ट्रेलियाई खेल आयोग ने मामले को कहीं ज्यादा गंभीरता से लिया है।
एएससी के दबाव में सीए ने स्मिथ और वार्नर को फौरन पद-मुक्त कर दिया। 2015 से स्मिथ आस्ट्रेलिया के लिए काफी सफल कप्तान रहे हैं, पर अब वे किरकिरी का कारण बन गए हैं। हो सकता है अब वे आइपीएल में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी भी न कर पाएं। जीतने का जज्बा जरूरी है और वही खेलों को रोमांचक बनाता है। पर जज्बा और किसी भी कीमत पर जीत हासिल करने की मनोवृत्ति, दो एकदम अलग-अलग चीजें हैं। किसी भी कीमत पर जीतने की अंध-इच्छा गलत-सही के विवेक को हर लेती है और तब जहां खिलाड़ी को बेईमानी से संकोच नहीं होता, वहीं दर्शक या प्रशंसक उन्मादी बन जाते हैं जो खेल नहीं, हर हाल में सिर्फ अपनी टीम की जीत देखना चाहते हैं। इस मानसिकता से उबरे बिना खेलों को बेईमानी का खेल बनने से नहीं रोका जा सकता।

