हिमाचल प्रदेश के कसौली और धरमपुर इलाके में अवैध निर्माण गिराने के दौरान एक महिला अधिकारी की हत्या से यही लगता है कि गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त लोग शायद बेखौफ अपना काम कर रहे थे। हैरानी की बात है कि अवैध रूप से बने एक गेस्ट हाउस को तोड़ने वाली टीम को साथ लेकर पहुंची सहायक नगर नियोजन अधिकारी को गोली तब मारी गई, जब उनके आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे। यही नहीं, बेलगाम तरीके से गोलीबारी करने के बाद गेस्ट हाउस का आरोपी मालिक मौके से फरार भी हो गया। जाहिर है, यह जोखिम की स्थितियों में ड्यूटी के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था में बरती गई ऐसी लापरवाही थी, जिसके चलते एक अफसर की जान चली गई और एक मजदूर घायल हो गया। स्वाभाविक ही सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का तुरंत स्वत: संज्ञान लिया और कहा कि यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है कि सरकारी अधिकारी न्यायालय के निर्देश का पालन कराने वहां गए थे। अदालत ने पूछा कि अवैध निर्माण हटाने के लिए चले अभियान के दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ गया पुलिस दल उस वक्त क्या कर रहा था, जब गेस्ट हाउस के मालिक ने महिला अधिकारी को गोली मारी!
गौरतलब है कि एक गैर-सरकारी संगठन की याचिका पर एनजीटी यानी राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने बिना मंजूरी के गैरकानूनी रूप से बनाई गई इमारतों को ढहाने और कई प्रतिष्ठानों को बंद करने का आदेश दिया था। एनजीटी ने पारिस्थितिकी को भारी नुकसान पहुंचाने, पर्यावरण को प्रदूषित करने और अवैध निर्माणों के लिए कई होटलों पर भारी जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद कसौली में कई होटलों और गेस्ट हाउस मालिकों ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते सत्रह अप्रैल को साफ कहा था कि पैसा बनाने के लिए लोगों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती। यह किसी से छिपा नहीं है कि हिमाचल प्रदेश में ज्यादा पर्यटकों की आवाजाही वाले तमाम ऐसे इलाकों में बहुत सारे व्यवसायियों ने पैसा बनाने के लिए होटलों या रिहाइशी इमारतों में तय नियम-कायदों को धता कर अतिरिक्त निर्माण कर लिए हैं। कई होटलों और रिसॉर्ट के मालिकों को नियमों के तहत सिर्फ दो मंजिला इमारत बनाने की इजाजत मिली थी। लेकिन उन्होंने इमारत को छह मंजिला तक बनवा लिया।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे क्या खतरे हो सकते हैं। न केवल कसौली या धरमपुर में, बल्कि पर्यटन के लिहाज से हिमाचल प्रदेश सहित दूसरे पहाड़ी इलाकों में भी इस तरह के अवैध निर्माणों ने उन शहरों को खतरे में डाल दिया है। अक्सर होने वाले भूस्खलन और उसके जोखिमों के बावजूद आमतौर पर इस पहलू की अनदेखी की जाती है, लेकिन जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तब कुछ लोगों का ध्यान इस ओर जाता है। सवाल है कि सरकार और संबंधित महकमों से जुड़े जिन अधिकारियों की निगाह बहुत छोटी गैरकानूनी गतिविधियों पर भी चली जाती है, वहां कसौली और धरमपुर के होटलों को दो की जगह छह मंजिला बनाने पर उनका ध्यान क्यों नहीं गया? स्थानीय स्तर पर प्रशासन या पुलिस अफसरों की मिलीभगत के बिना ऐसे निर्माणों को कैसे अंजाम दिया जा सकता है! विडंबना है कि जब कोई ईमानदार अधिकारी कानूनों पर अमल सुनिश्चित कराने के लिए सख्ती बरतता है तो उसकी जान ले ली जाती है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर गैरकानूनी गतिविधियों पर शुरुआत में ही लगाम कसी जाए, तो अपराधी तत्त्वों पर काबू पाना आसान होगा।
