मंगलवार को देश के दो अलग-अलग हवाई अड््डों पर हुए दो वाकयों ने हवाई यातायात की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ये दोनों घटनाएं हादसे की शक्ल अख्तियार कर सकती थीं, शुक्र है कि वैसा नहीं हुआ। मगर इससे नागरिक उड््डयन महानिदेशालय और एटीसी यानी हवाई यातायात नियंत्रण अपनी जिम्मेवारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। मंगलवार को तड़के गोवा के दाबोलिम हवाई अड््डे पर मुंबई जाने वाला एक विमान अचानक रनवे पर फिसल कर तीन सौ साठ डिग्री घूम गया और कोई तीन सौ मीटर जाकर झटके से रुक गया। इसमें एक सौ साठ यात्री सवार थे। पंद्रह को कुछ चोटें आई हैं। पहली नजर में ही यह पायलट की लापरवाही का मामला लगता है। इसलिए स्वाभाविक ही विमान के दोनों पायलटों को निलंबित कर घटना की जांच शुरू कर दी गई। इसी के कुछ घंटे बाद दूसरा वाकया हुआ। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड््डे के 1डी के रनवे पर दो प्राइवेट एअरलाइन- इंडिगो और स्पाइसजेट- के विमान आमने-सामने आ गए। इंडिगो का विमान लखनऊ से यहां उतरा था, जबकि स्पाइसजेट का विमान हैदराबाद जाने की तैयारी में था।

हालांकि दोनों विमानों के कमांडर ने समय रहते एटीसी यानी एअर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचित किया, और विमानों के इंजन बंद कर दिए, जिससे हादसा टल गया। पर मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों एअरलाइनों के अधिकारी स्पष्टीकरण देने में जुट गए। स्पाइसजेट की ओर से कहा गया कि दिल्ली से हैदराबाद जा रहा उसका विमान एसजी-123 एटीसी के निर्देशों का पालन कर रहा था। पायलट ने सूझबूझ दिखाई और विमान को वहीं रोक दिया, और एटीसी को फौरन सूचना दी। इंडिगो ने भी कहा है कि उसके पायलट ने ठीक सामने दूसरे विमान को देखा तो फौरन इंजन बंद करने का निर्णय किया और एटीसी को तुरंत स्थिति की सूचना दी। फिर गड़बड़ी कहां हुई? ऐसा लगता है कि या तो एटीसी की तरफ से कुछ लापरवाही हुई या एटीसी और पायलट के बीच गलतफहमी। पूरी हकीकत जानने के लिए जांच पूरी होने का इंतजार करना होगा। पर ऐसे समय जब नई उड््डयन नीति के तहत देश में हवाई यातायात का दायरा बढ़ाने का दम भरा जा रहा हो, इस तरह की चूक और लापरवाही अक्षम्य है और इससे बहुत गलत संदेश जाता है। ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब दो अलग-अलग एअरलाइन के दो विमान नागपुर के ऊपर हवा में टकराते-टकराते बच गए थे। यह खुशकिस्मती की बात है, पर चिंता की भी।

आंकड़े बताते हैं कि इस तरह के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। बहुत-से हवाई अड््डों का हाल यह है कि नवंबर 2014 में सूरत में उड़ान भरने के समय जानवर से एक विमान टकरा गया था। इसके कुछ दिन बाद जबलपुर में विमान के उतरते वक्त एक जानवर रनवे पर आ गया था। ताजा घटनाओं के बाद नियामक निकाय यानी नागरिक उड्डयन निदेशालय ने एअर ट्रैफिक कंट्रोलर को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया। लेकिन निदेशालय और मंत्रालय को गहराई से सोचना होगा कि आखिर इस तरह के मामले क्यों बढ़ रहे हैं। कहीं इसका कुछ संबंध व्यवस्था की खामी से तो नहीं है? गौरतलब है कि एटीसी में बहुत-से स्वीकृत पद खाली हैं और उसे कर्मचारियों की कमी से जूझना पड़ रहा है। यह उचित मौका है कि सरकार की नजर इस तरह की व्यवस्थागत खामियों पर भी जाए।