सूसी, तोड़फोड़ और आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को मौत जाकी सजा सुनाए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लगातार खराब होते गए हैं। अब भारत ने पाकिस्तान के साथ होने वाली सभी वार्ताएं अस्थायी तौर पर रद्द कर दी हैं। पिछले हफ्ते अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सिंधु जल आयोग की बैठक होनी थी, उसे रोक दिया गया। इस हफ्ते नई दिल्ली में समुद्री सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर दोनों देशों के तटरक्षक बलों की होने वाली बैठक को भारत सरकार ने आखिरी समय में रद्द कर दिया। पिछले साल पठानकोट और उड़ी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की बातचीत बंद हो गई थी। मगर पिछले महीने सिंधु जल मसले पर बातचीत के लिए भारतीय शिष्टमंडल पाकिस्तान गया तो एक बार फिर बातचीत का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद बनी। उसी के आधार पर निम्न स्तर की कुछ बैठकें तय हुई थीं, मगर अब ऐसी किसी भी बातचीत पर विराम लग गया है।

भारत-पाकिस्तान रिश्तों में ताजा कड़वाहट कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के अड़ियल रवैए की वजह से आई है। भारत की तरफ से जाधव के खिलाफ दायर आरोपों और अदालती फैसले की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए चौदह बार अपील की गई, मगर पाकिस्तान ने उससे जुड़ी कोई भी जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। यहां तक कि जाधव को कोई परामर्शदाता उपलब्ध नहीं कराया गया। भारत का कहना है कि जाधव भारतीय नौसेना से सेवामुक्त होने के बाद ईरान के चाबहार में अपना कारोबार कर रहे थे। वहां से उन्हें अगवा करके पाकिस्तान लाया गया और उनके खिलाफ आतंकवाद फैलाने, जासूसी और तोड़फोड़ करने का आरोप लगा कर पाकिस्तानी सेना ने फांसी की सजा सुना दी। हैरानी की बात है कि पाकिस्तान इस बात का कोई सबूत उपलब्ध नहीं करा पा रहा कि उसके यहां हुई किन-किन आतंकवादी घटनाओं में जाधव की संलिप्ता थी। स्वाभाविक है कि पाकिस्तान सुनियोजित तरीके से एक ऐसे भारतीय नागरिक को जिंदा पकड़े गए आतंकवादी के तौर पर पेश करना चाहता है, जिसकी पुख्ता पहचान भारत सरकार के पास हो और उसके जरिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब की जा सके।

दरअसल, पिछले करीब साल भर से पाकिस्तान अलग-थलग हो गया है। भारत उसे अपने यहां हुई तमाम आतंकवादी गतिविधियों के प्रमाण दे चुका है। कई जिंदा आतंकवादियों को पकड़ कर उनके बयान पेश कर चुका है। फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से दूरी न बना पाने को लेकर दबाव बनाता रहा है। सार्क देशों से लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में उसकी छवि दहशतगर्दों के पनाहगाह देश के रूप में बनती गई है। हालांकि पहले भी वह कई बार आरोप लगा चुका है कि भारत पाकिस्तान को अस्थिर करने वाली ताकतों को बढ़ावा दे रहा है, पर इस बार वह जाधव के जरिए शायद यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि भारत खुद आतंकवाद को बढ़ावा देता है। मगर जिस तरह वह साजिशन एक निर्दोष को फांसी पर चढ़ा कर भारत को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहा है, उससे उसकी असलियत और खुलेगी। इस तरह तनातनी के माहौल में मसले सुलझने के बजाय और उलझेंगे। अगर उसे अमन की फिक्र होती तो इस तरह बेबुनियाद किस्से गढ़ कर हंगामा खड़ा न करता।