Indian-EU FTA: बदलते दौर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत अपनी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में अब भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक समझौता होने वाला है, जिसकी घोषणा द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में किए जाने की संभावना है।

इसके तहत रक्षा क्षेत्र, समुद्री सुरक्षा एवं आतंक के खिलाफ साझा मोर्चेबंदी, भारतीय और यूरोपीय नागरिकों की आसान आवाजाही तथा वस्त्र उद्योग एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार खुलेंगे। यह समझौता इसलिए भी अहम होगा, क्योंकि माना जा रहा है कि इससे अमेरिका की शुल्क नीति के प्रभाव से निपटने के लिए भारत और यूरोपीय देशों के बीच साझा एवं व्यापक दृष्टिकोण विकसित होगा।

अनुमान है कि इस समझौते से दो अरब लोगों का एक ऐसा बाजार बनेगा, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा। इससे न केवल भारत के निर्यात को गति मिलेगी, बल्कि यहां के पेशेवरों के लिए यूरोपीय देशों में रोजगार पाने का रास्ता भी सुगम हो जाएगा।
इसमें दोराय नहीं कि अमेरिका की ओर से भारत पर पचास फीसद शुल्क लगाए जाने के बाद देश का निर्यात कारोबार प्रभावित हुआ है।

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नतीजतन, भारत अपने उत्पादों के लिए दुनिया के विभिन्न देशों में वैकल्पिक बाजार तलाशने के हर संभव प्रयास में जुटा है। हाल ही में भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार एवं व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप दिया है। इससे पहले ब्रिटेन और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए गए थे। यूरोपीय संघ के साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार वर्ष 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मसलों पर आपसी सहमति न बनने के कारण वर्ष 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी।

जून, 2022 में वार्ता को फिर से आगे बढ़ाया गया, जो निर्णायक रही। अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में गुणात्मक बदलाव लाएगा। माना जा रहा है कि शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी देने के अलावा दोनों पक्ष रक्षा ढांचागत समझौता और एक रणनीतिक एजंडा भी प्रस्तुत करेंगे।

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गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय संघ वर्ष 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। प्रस्तावित सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और गहरा करने में सहायक होगी। इससे रक्षा क्षेत्र में आपसी तालमेल बढ़ेगा और भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के ‘सेफ’ (सिक्योरिटी एक्शन फार यूरोप) कार्यक्रम में भागीदारी के रास्ते खुलेंगे। विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक समझौते से देश के वस्त्र निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा परिधान बाजार है। वर्तमान में भारत इस क्षेत्र में 4.5 अरब डालर से अधिक मूल्य के परिधानों का निर्यात करता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डालर का था, जिसमें निर्यात की हिस्सेदारी करीब 76 अरब अमेरिकी डालर थी।

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अब बहु-प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लगने से निश्चित रूप से द्विपक्षीय व्यापार को एक नई दिशा मिलेगी और भारत के निर्यात कारोबार पर अमेरिकी शुल्क के प्रभाव को कम करने में भी काफी मदद मिलेगी।