निश्चित रूप से यह भारत और सभी देशवासियों के लिए खूब बधाई और खुश होने का मौका है कि चंद्रयान-3 ने चांद की सतह पर उतर कर इतिहास रच दिया है। यों इस बार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी इसरो ने जैसी तैयारी की थी, उसमें पहले ही यह उम्मीद मजबूत दिख रही थी कि देश का विज्ञान एक नया आसमान छूने जा रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में हुए प्रयोगों में अब तक के अनुभवों को देखते हुए अंतिम पल तक सबकी सांसें एक तरह से रुकी हुई थीं।
यह स्थिति स्वाभाविक ही थी क्योंकि ऐसे अभियानों में आखिरी के कुछ पल सबसे महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। लेकिन चौदह जुलाई के बाद अपनी चालीस दिन की यात्रा पूरी कर चंद्रयान-3 बुधवार शाम को ठीक जिस पल चांद की सतह पर कामयाबी के साथ उतरा, उस पल ने दुनिया भर में देश का माथा ऊंचा कर दिया।
आज भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने में अपना झंडा लहराया। इसके साथ ही एक बार फिर यह साबित हुआ है कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश के वैज्ञानिकों और खासतौर पर इसरो ने जिस स्तर पर जाकर काम किया है, उसने आज दुनिया भर में भारत को एक बड़ा सम्मान दिलाया है।
हालांकि इससे पहले अंतरिक्ष में अन्य तमाम उपलब्धियों के जरिए देश ने सफलता की एक लंबी शृंखला कायम की है, लेकिन चंद्रयान-3 के अभियान को दुनिया भर में जिस तरह देखा जा रहा था, उससे इसकी अहमियत की भी पुष्टि होती है। अब ताजा सफलता के साथ ही अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारत को एक नई और बेहतर जगह बनेगी।
यह बेवजह नहीं है कि चंद्रयान-3 के चांद के सतह पर उतरने के साथ ही तमाम बड़े देशों और उनके नेताओं की ओर से भारत के लिए विशेष बधाइयां भेजी गईं। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि दुनिया के कई वैसे देश, जो विज्ञान और तकनीक के मामले में दुनिया भर में अग्रणी माने जाते हैं, भारत आज उनके समांतर खड़ा होने और कई मामलों में आगे निकल जाने का सफर तय कर चुका है।
यह भी गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले रूस को तब बड़ा झटका लगा था, जब ‘लूना-25’ चांद की सतह पर पहुंचने के पहले ही तबाह हो गया। जाहिर है, भारत ने इस क्षेत्र में भी अपनी क्षमता साबित है, लेकिन इसका लाभ दुनिया भर को मिलने वाला है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि चंद्रयान-3 का मिशन पूरी मानवता के लिए है, यह मानवतावादी विचार पर आधारित है।
अंतरिक्ष को जानने-समझने के क्रम में भी हमारा विज्ञान आज नई ऊंचाइयों को हासिल कर सका है और दुनिया एक अंधेरे युग से निकल सकी है। इस क्रम में कई देशों के अभियानों के जरिए अंतरिक्ष के अनंत आकाश के बारे में समझने में मदद मिली है। अब चंद्रयान-3 इसमें नया अध्याय रचने जा रहा है। इसरो की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चंद्रयान-3 के लिए मुख्य रूप से तीन उद्देश्य निर्धारित किए गए थे।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की ‘साफ्ट लैंडिंग’ कराना, चंद्रमा की सतह कही जाने वाली ‘रेजोलिथ’ पर लैंडर को उतारना और घुमाना, लैंडर और रोवर्स से चंद्रमा की सतह पर शोध कराना। जाहिर है, कामयाबी का पहला चरण शानदार तरीके से पूरा करने के बाद अब चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा के बारे में जो भी हासिल किया जा सकेगा, वह पूरी दुनिया के लिए उपयोगी होगा। और यह सभी भारतीयों के लिए गर्व करने के पल हैं।
