वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के मुद्दे पर भी भारत ने बातचीत से मसले को सुलझाने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता कायम रखने पर जोर दिया है। साथ ही तेल समृद्ध वेनेजुएला में तेजी से बदल रही स्थिति पर करीबी नजर भी रखी जा रही है, ताकि आने वाले समय में राष्ट्रहित की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जा सकें। भारत सहित कई देशों ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है और वेनेजुएला की संप्रभुता एवं वहां के लोगों की सुरक्षा की वकालत की है।

इस बीच, यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी राष्ट्र पर हमला कर वहां के प्रमुख और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाने की अमेरिका की कार्रवाई क्या अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों का उल्लंघन नहीं है? गौरतलब है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का लगातार आरोप लगाने के बाद शुक्रवार देर रात राजधानी काराकस पर हमला कर दिया था। इस दौरान मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर न्यूयार्क ले जाया गया।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि मादुरो के खिलाफ न्यूयार्क में मुकदमा चलाया जाएगा। यह कोई पहली बार नहीं है कि अमेरिका ने किसी देश में सत्ता परिवर्तन का प्रयास किया है। वर्ष 1965 में अमेरिका ने डोमिनिकन गणराज्य में बड़ी संख्या में अपने सैनिक भेजे, ताकि 1963 में तख्तापलट के तहत हटाए गए पूर्व राष्ट्रपति जुआन बोश की वापसी को रोका जा सके। वर्ष 1989 में अमेरिकी सैनिकों ने पनामा पर धावा बोला, जिसका मकसद तत्कालीन जनरल मैनुअल नोरिएगा को हटाना था, जिन पर मादुरो की तरह ही मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप थे।

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वर्ष 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हमला कर सद्दाम हुसैन के लंबे शासन का अंत कर दिया गया। इसी तरह वर्ष 2004 में हैती के तत्कालीन राष्ट्रपति को सत्ता से हटाकर अफ्रीका भेज दिया गया। यह बात सही है कि अगर दुनिया के किसी हिस्से में मानव सुरक्षा का गंभीर संकट हो, तो किसी दूसरे देश के हस्तक्षेप को तभी उचित ठहराया जा सकता है, जब यह सब अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों के दायरे में किया जाए। शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी हस्तक्षेप की अक्सर निंदा की जाती थी, लेकिन इससे कभी भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वैधता को सीधे तौर पर खतरा महसूस नहीं हुआ।

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मगर पिछले कुछ दशकों से यह देखने में आया है कि कुछ शक्तिशाली देश वैश्विक मानव हित के बजाय अपने निजी स्वार्थों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई को भी कुछ देश इसी नजर से देख रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस खतरनाक चलन को लेकर गहरी चिंता जताई है, जिसे अमेरिका बढ़ावा दे रहा है। इस बात पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है कि विश्व में शांति एवं स्थिरता के वास्ते सभी देशों ने मिलकर जो अंतरराष्ट्रीय कानून बनाए हैं, उनके महत्त्व और प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए संतुलित रुख बेहद जरूरी है।

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