आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे मंगलवार को एक अनोखी घटना का गवाह बना। संडीला रोड खम्होली के निकट एक्सप्रेस वे पर भारतीय वायुसेना की 85 वीं सालगिरह के मौके पर सत्रह विमानों ने लैंडिंग की। यह मुजाहिरा यह जताने के लिए किया गया कि आपात स्थिति में एक्सप्रेस वे का उपयोग लड़ाकू और मालवाहक विमान उतारने और उड़ान भरने के लिए किया जा सकता है। मिराज-2000, सुखोई-30 और सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस सहित भारतीय वायुसेना के दर्जन भर से अधिक विमानों ने उन्नाव जिले के बांगरमऊ में एक्सप्रेस वे पर हुए अभ्यास में हिस्सा लिया। विमानों को विशेष रूप से तैयार हवाई पट्टी पर उतारा गया और वहीं से उड़ानें भी भरी गर्इं। गौरतलब है कि मालवाहक विमान राहत अभियानों में भी इस्तेमाल होते हैं। पहली बार इस एक्सप्रेस वे पर मालवाहक उतारे गए हैं। बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदा के वक्त इनकी मदद ली जाती है। जिन विमानों को उतारा गया, वे बड़ी मात्रा में राहत सामग्री ढो सकते हैं और विपत्ति में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद करते हैं।
इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसी स्थितियों में वायु सेना की तैयारियों का जायजा लेना था। तीन घंटे तक चले अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के विशेष बल गरुड़ कमांडो सी-130जे विमान से उतरे और एक्सप्रेस वे के दोनों ओर मोर्चा संभाला। मालवाहक विमान दो सौ कमांडो भी लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। इन्हें वायुसेना में 2010 में शामिल किया गया था। इससे पहले 2015 में मिराज विमान दिल्ली के निकट यमुना एक्सप्रेस वे पर उतरा था। मई 2016 में भी इसी तरह का एक अन्य अभ्यास हुआ, जबकि पिछले साल नवंबर में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस पर युद्धक विमानों की उड़ान का प्रदर्शन इसके उद्घाटन के मौके पर कराया था। तभी से इसे आम जनता के लिए खोला गया। शायद यह पहला अवसर था, जब किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर विमानों का प्रदर्शन किया गया था।
लड़ाकू विमानों को देखने के लिए सुबह से लोगों का मजमा लग गया था। विमानों ने करतब भी दिखाए। यों तो भारत में एअरबेस की कमी नहीं है, लेकिन एक्सप्रेस वे को एक वैकल्पिक हवाई पट्टी के रूप में इस्तेमाल करने का चलन इधर बढ़ा है। किसी आपातकाल या युद्धकाल में अगर एअरबेस को नुकसान पहुंचा दिया जाए तो ये एक्सप्रेस वे बड़े काम के साबित होंगे। यह अच्छी बात भी है कि देश में एक्सप्रेस वे बनाने को लेकर कई राज्यों में उत्साह देखा जा रहा है। दूसरे कई मुल्क भी हैं, जिन्होंने अपने राजमार्गों को हवाई पट्टी के रूप में इस्तेमाल करने के लिए तैयार कर रखा है। इनमें उत्तरी कोरिया, ताइवान, फिनलैंड, स्विटजरलैंड, पोलैंड और पाकिस्तान आदि शामिल हैं। भारत ने भी इस दिशा में सही कदम उठाया है, तो इसकी तारीफ की जानी चाहिए।

