Vikas Dubey Encounter: ‘बिकरू में होता तो जिंदा जला देता..’ मरने से पहले कानपुर के कुख्यात गैंग्स्टर विकास दुबे के यह शब्द बताते हैं कि उसके अंदर कानून का खौफ जरा भी नहीं था। जब उज्जैन के महाकाल मंदिर के पास से पुलिस ने विकास दुबे को पकड़ा था तब वो चिल्ला रहा था कि ‘मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला..’ इसपर एक पुलिसवाले ने उसे चुप कराते हुए एक तमाचा भी जड़ा था। इसका वीडियो भी सामने आया था।

अब इस बात का भी खुलासा हुआ है कि विकास दुबे ने अपनी हनक बड़े पुलिस अधिकारियों के सामने भी दिखाई थी। दरअसल ‘अमर उजाला’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि उज्जैन में गिरफ्तारी के दौरान विकास दुबे ने हथकड़ी पहनने से इनकार कर दिया था। सिपाही ने जब उसे जबरन हथकड़ी पहनाने की कोशिश तो उसने बड़े पुलिस अधिकारियों के सामने सिपाही को अपनी हनक दिखाते हुए कहा कि ‘बिकरू में होता तो जिंदा जला देता…’

विकास दुबे के इस भयानक धमकी को सुन सभी पुलिसवाले चौंक गए। इसके बाद उसे एक-दो थप्पड़ भी जड़ा गया था। बताया जा रहा है कि सार्वजनिक तौर से पकड़े जाने के बाद विकास दुबे को इस बात का यकीन हो गया था कि अब वो अपने बाकी साथियों की तरह मारा नहीं जाएगा औऱ इसीलिए वो पुलिस वालों से बदसलूकी कर रहा था।

यह भी खबर सामने आ रही है कि विकास दुबे हथकड़ी पहनने से इनकार कर रहा था और उसका कहना था कि उसने सरेंडर किया है ना कि पकड़ा गया है। उसने पुलिसवालों से कहा था कि वो जब तक चाहता तब तक फरार रहता और उसे कोई पकड़ नहीं सकता था।

कहा जा रहा है कि उज्जैन से लौटते वक्त रास्ते में एसटीएफ की टीम विकास दुबे से पूछताछ कर रही थी लेकिन विकास सारे सवालों का सीधा-सीधा नहीं बल्कि घूमा-फिरा कर जवाब दे रहा था। विकास दुबे अपने आकाओं पर यकीन करता था और उसे भरोसा था कि उसके आका उसे छुड़ा लेंगे।

बता दें कि 10 जुलाई को विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। कानपुर बॉर्डर के पास एसटीएफ की गाड़ी हादसे का शिकार होकर पलट गई थी। गैंगस्टर विकास दुबे ने एक पुलिसकर्मी की हथियार छीन कर भागने की कोशिश की थी जिसके बाद पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार गिराया था।