उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर स्थित गोड़िया मठ से 8 बच्चों को मुक्त कराया गया है। आरोप है कि इन नाबालिग बच्चों को यहां टॉर्चर किया जाता था। बच्चों से यहां खाना बनवाने, बर्तन धुलवाने और झाड़ू-पोंछा लगवाने जैसा काम जबरन कराया जाता था। इस मामले में यहां पुलिस ने बुधवार (08-07-2019) को जानकारी दी है कि जबरन बंधुआ मजदूर बनाकर रखे गए बच्चों को शुक्रतीर्थ स्थित आश्रम से छुड़ाया गया है।

इन सभी बच्चों की उम्र 7-10 साल बताई जा रही है। यह बच्चे त्रिपुरा और मिजोरम के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव के मुताबिक पुलिस और चाइल्ड केयर की एक टीम ने मंगलवार की देर शाम आश्रम में छापेमारी कर नाबालिग बच्चों को आजाद कराया।

आरोप है कि इन बच्चों को पढ़ाई के नाम पर मठ में लाया गया था और फिर इनसे बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जाता था। ‘अमर उजाला’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हेल्पलाइन को मठ में 10 बच्चों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी।

हालांकि छापेमारी के दौरान आश्रम में सिर्फ 8 बच्चे ही मिले हैं। हेल्प लाइन के सदस्यों का कहना है कि 2 अन्य बच्चों की तलाश की जा रही है। अगर यह दोनों बच्चे नहीं मिले तो आश्रम प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इधर इस मामले पर गोड़िया मठ से जुड़े भक्ति भूषण गोविंद ने बच्चों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बच्चों को उनके परिजनों की सहमति से आश्रम में लाया गया हे। बच्चों से आश्रम में किसी तरह का काम नहीं कराया जाता, उनकी इच्छा के अनुसार केवल गोसेवा कराई जाती है।

चाइल्ड केयर हेल्पलाइन की इंचार्ज पूनम शर्मा ने कहा कि बच्चों की काउंसिलिंग की जाएगी। बहरहाल अब पुलिस इस मामले की पड़ताल कर रही है और बच्चों को उनके माता-पिता के पास भेजने की तैयारी भी की जा रही है।