CM के हेलीकॉप्टर को राजा मान सिंह ने अपनी जीप से तहत-नहस कर दिया और फिर पुलिसवालों ने मानसिंह को घेर कर उनका एनकाउंटर कर दिया। करीब 36 साल पुराने इस मामले में अब मथुरा की सीबीआई कोर्ट ने 11 पूर्व पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है और अब इन सभी को उम्रकैद की सजा बुधवार (22-07-2020) को सुनाई गई है।इससे पहले अरसे से चल रहे इस मुकदमे को मथुरा डिस्ट्रिक्ट जज साधना रानी ठाकुर ने मंगलवार को फैसला सुनाते 11 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया था। इस केस में तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। फैसले के बाद सभी 11 दोषियों को कड़ी सुरक्षा में अस्थाई जेल भेज दिया गया।
यह मामला राजस्थान के भरतपुर राजपरिवार से जुड़ा हुआ है। डीग से 7 बार निर्दलीय विधायक रह चुके राजा मान सिंह के खिलाफ साल 1985 में कांग्रेस पार्टी ने एक रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर विजेंद्र सिंह को चुनावी रण में उतारा। कहा जाता है कि 20 फरवरी 1985 को कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने राजा मान सिंह के पोस्टर और उनके बैनर फाड़ दिये और इस बात से राजा काफी नाराज हो गए।
राजस्थान में उस वक्त कांग्रेस की सरकार थी। राज्य के मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर इसी साल हेलीकॉप्टर से डीग में विजेंद्र सिंह के समर्थन में संभा को संबोधित करने आए थे। बताया जाता है कि राजा मान सिंह ने अपनी जीप से सीएम का मंच तोड़ दिया और उनके हेलीकॉप्टर को भी उन्होंने अपनी जीत से तोड़ा। इस घटना के बाद यहां तनाव पैदा हो गया था और यहां कर्फ्यू भी लगाया गया था।
आरोप है कि इस मामले में जब राजा मान सिंह जीप में सवार सरेंडर करने जा रहे थे तब डीग कस्बे की अनाज मंडी के पास पुलिस की एक टीम ने एनकाउंटर में उन्हें मार गिराया। इस एनकाउंटर में राजा मान सिंह, हरि सिंह और सुमेर सिंह मारे गए थे। जिस वक्त राजा की मौत हुई, उनकी उम्र 64 वर्ष थी। राजा मान सिंह भरतपुर के अंतिम राजा सवाई वृजेन्द्र सिंह के छोटे भाई और महाराजा किशन सिंह के बेटे थे। राजा मान सिंह का जन्म 5 दिसंबर, 1921 को हुई था। उन्होंने इंग्लैंड में इंजीनियरिंग की पढा़ई खी थी।
बाद में इस मामले में फेक एनकाउंटर को लेकर एक केस दर्ज कराया गया था। राजा मान सिंह की बेटी और भारतीय जनता पार्टी नेता कृष्णेंद्र कौर दीपा ने के आग्रह पर इस केस को मथुरा ट्रांसफऱ किया गया था। इस मामले में डीएसपी कान सिंह भाटी समेत 18 पुलिसकर्मियों पर केस हुआ था। 18 में से 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। इन सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 148 और 149 के तहत दोषी पाया गया है। इस मामले में करीब 1700 तारीख पड़ी थीं।

