इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को डॉक्टर कफील खान पर लगे NSA को हटाने का निर्देश जारी किया है। अदालत ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 13 दिसंबर, 2019 को एंटी-सीएए प्रोटेस्ट के दौरान डॉक्टर कफील खान के द्वारा दिये गये भाषण में किसी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा देने जैसी बातें नहीं कही गई थी जिसके आधार पर नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट की धारा लगाई जाए। चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस सुमित्रा दयाल सिंह की बेंच ने कहा कि ‘हमें यह बात कहने में कोई संकोच नहीं है कि डॉक्टर कफील खान को नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट 1980 के तहत नजरबंद करना कानून की नजरों में सही नहीं है।’

आपको बता दें कि जिला मजिस्ट्रेट ने 13 फरवरी 2019 को डॉक्टर कफील खान पर एनएसए लगाने का आदेश दिया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह पाया है कि दिसंबर में दिये गये कफील खान के भाषणों से कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ी थी। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि 12.12.2019 को कफील खान के द्वारा दिये गये भाषण की वजह 13 तारीख को हिंसा हुआ ऐसा नहीं लगता।

अदालत ने कहा कि ‘प्रथम दृष्टया डॉक्टर कफील खान की बातों को सुनकर ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने कहीं से भी हिंसा को बढ़ावा देने जैसी बातें कही हों। यह भी जाहिर होता है कि इससे अलीगढ़ की शांति व्यवस्था को कोई खतरा नहीं था। कफील खान की बातें राष्ट्रीय अखंडता और लोगों के बीच एकता को लेकर कही गई हैं। स्पीच के जरिए किसी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा देने की कोशिश नहीं की गई है। ऐसा लगता है कि जिला मजिस्ट्रेट ने उनके कुछ चुनिंदा बातों पर ही ध्यान दिया जबकि भाषणों की सच्चाई को नजरअंदाज कर दिया गया।

डॉक्टर कफील खान को इसी साल जनवरी के महीने में मुंबई में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सीजेएम की अदालत से 10 फरवरी को जमानत मिल गई थी। हालांकि एनएसए एक्ट के तहत उन्हें जेल में रहना पड़ा था। डॉक्टक कफील पिछले 6 महीनों से जेल में बंद थे। हाल ही में उनकी हिरासत को 3 महीने के लिए बढ़ाया गया था। डॉक्टर कफील ने जेल से पीएम मोदी को चिट्ठी लिख रिहा करने और कोविड-19 मरीजों की सेवा करने की मांग की थी, उन्होंने सरकार के लिए एक रोडमैड भी भेजा था।