दिल्ली में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने फर्जी बिलों के आधार पर जीएसटी व्यवस्था के तहत कर लाभ उठाने का गोरखधंधा वालों का खुलासा हुआ है। बता दें यह लोग एक गिरोह के रुप में काम करते है। इस मामले में कथित तौर पर 22 करोड़ रुपयए का कर लाभ गलत तरीके से हासिल करने का मामला भी सामने आया है। इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि हरियाणा के बाद अब दिल्ली में ऐेसी घटना सामने आई है। पिछले हफ्ते एक ऐसे ही मामले में हरियाणा में ऐसे ही फर्जी जीएसटी बिल बनाकर सरकार को चूना लगाने का खुलासा हुआ था।
बिना सप्लाई किए फर्जी जीएसटी बिल बनातेः राजस्व विभाग ने शुक्रवार (15 नवंबर) को एक बयान में बताया कि केंद्रीय जीएसटी के उत्तर क्षेत्र के दिल्ली स्थित आयुक्त कार्यालय ने इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह माल एवं सेवाओं की सप्लाई किए बिना ही फर्जी बिल बनाने के काम करते थे। इस खुलासे के बाद कई और ऐसे मामले सामने आने की बात भी सामने आई है।
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42 फर्जी फर्म चला रहे थे आरोपीः बता दें कि इस मामले में नवीन मुटरेजा और केशव राम को गिरफ्तार किया गया है। स्थानीय अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। विभाग ने यह भी बताया कि आरोपी 42 फर्जी फर्म को चला रहे थे ताकि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) सुविधा का लाभ उठा सकें। इस प्रकार वह सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे।
दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा की बड़ी शहरों से किया जीएसटी पंजीकरणः राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बयान के अनुसार, ‘प्रथम दृष्टया 150 करोड़ रुपए के फर्जी बिल का इस्तेमाल कर 22 करोड़ रुपए का फर्जी आईटीसी लाभ उठाया गया है।’ दोनों आरोपियों का काम करने का तरीका आपस में जुड़ा है। इन्होंने असंदिग्ध लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फर्जी फर्मों का जीएसटी पंजीकरण हासिल किया। उनके नाम से अच्छी खासी संख्या में बिल और ई-वे बिल बनाए। यह सभी काम उन्होंने करोल बाग में एक स्थान पर किए। बयान में कहा गया है कि मामले की जांच जारी है।

