2012 Delhi Gang Rape Case: दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल प्रशासन को साल 2012 गैंगरेप केस के आरोपियों के खिलाफ नया डेथ वारंट अदालत से नहीं मिल सका है। दिल्ली की एक अदालत ने तिहाड़ प्रशासन से कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 फरवरी को दिए गए अपने फैसले में सभी आरोपियों को 7 दिनों के अंदर अपने सभी कानूनी अधिकारों के इस्तेमाल की इजाजत दी है। मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को अदालत ने कहा कि ‘अगर कानून ने उन्हें जिंदा रहने की इजाजत दी है तो ऐसे में उन्हें फांसी देना ‘पाप’ होगा।

अदालत में एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने तिहाड़ प्रशासन की याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल अटकलों और अनुमानों के आधार पर डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश ने कहा, ‘मैं दोषियों के वकील की इस दलील से सहमत हूं कि महज संदेह और अटकलबाजी के आधार पर मौत के वांरट को तामील नहीं किया जा सकता है। इस तरह, यह याचिका खारिज की जाती है। जब भी जरूरी हो तो सरकार उपयुक्त अर्जी देने के लिए स्वतंत्र है।’

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही सभी चारों दोषियों 32 साल के मुकेश सिंह, 25 साल के पवन गुप्ता, 26 साल के विनय कुमार शर्मा और 31 साल के अक्षय कुमार को 7 दिनों की मोहलत दी थी कि वो इन सात दिनों में अपने सभी कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर लें।

अदालत ने यह भी कहा था कि सभी आरोपियों को फांसी एक साथ ही दी जा सकती है अलग-अलग नहीं। इससे पहले केंद्र सरकार ने कोर्ट में अपनी याचिका दायर करते हुए कहा था कि इस केस के सभी दोषी कानून की आड़ लेकर जानबूझ कर बारी-बारी से अपनी याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं ताकि उन्हें फांसी पर चढ़ाए जाने में देरी हो सके।

हालांकि केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका पर 11 फरवरी को सुनवाई करेगा।


वहीं आज दिल्ली की अदालत की तरफ से इस मामले में फैसला आने के बाद पीड़िता की मां ने कहा कि ‘आज कोर्ट के पास ताकत और हमारे पास वक्त है। कुछ भी लंबित नहीं है, फिर भी डेथ वारंट जारी नहीं हुआ। यह हमारे साथ नाइंसाफी है। जब तक कोर्ट दोषियों को वक्त देता रहेगा और सरकार उन्हें सपोर्ट करती रहेगी, मैं इंतजार करूंगी।’