Coronavirus, Covid 19, Molestation in Isolation Ward: बिहार में कोरोना संदिग्ध एक महिला की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। मरने से पहले इस महिला ने आईसोलेशन वार्ड में अपने साथ छेड़खानी और यौन प्रताड़ना का आरोप लगाया था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने महिला के आरोपों की कोई जांच नहीं कराई और यहां तक की आनन-फानन में उसे अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया। अब महिला की मौत के छह दिनों बाद पुलिस ने बीते रविवार (12 अप्रैल, 2020) को आरोपी वार्ड बॉय को गिरफ्तार किया है।
यह मामला गया के मशहूर सरकारी अस्पताल अनुग्रह नारायण सिंह अस्पताल का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 22 साल की यह महिला अपने पति के साथ 26 मार्च को पंजाब के लुधियाना से गया आई थी। घर आने के बाद महिला ने तबीयत खराब होने की शिकायत की थी। दरअसल महिला का कुछ समय पहले गर्भपात हुआ था जिसकी वजह से उसकी तबीयत खराब हुई थी और उन्हें सांस लेने की समस्या भी शुरू हो गई थी।
इसके बाद महिला के परिजनों ने उन्हें 27 मार्च को गया के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। महिला को 2 दिनों तक इमरजेंसी वार्ड में रखा गया था। इसके बाद उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए बनाए गए आईसोलेशन वार्ड में 14 दिनों के लिए शिफ्ट कर दिया गया।
अचानक 2 अप्रैल को महिला को इस वार्ड से डिस्चार्ज कर दिया गया। दरअसल जब इस महिला ने एक वार्ड बॉय पर यौन उत्पीड़न करने का इल्जाम लगाया था तब उस वक्त अस्पताल में काफी हंगामा भी हुआ था।
हंगामे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने महिला को वार्ड से डिस्चार्ज कर दिया। अब घर जाने के बाद 6 अप्रैल को महिला की मौत हो गई। जिसके बाद महिला की सास ने 8 अप्रैल को इस मामले में केस दर्ज कराया।
महिला की सास ने यहां मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनकी बहू ने उन्हें बताया था कि वार्ड में 2 दिनों तक उन्हें यौन प्रताड़ना दी गई। जब उन्होंने इस मामले को अस्पताल के अन्य कर्मियों के सामने उठाया तो उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने ‘The Telegraph’ से बातचीत करते हुए कहा कि ‘इस मामले में सिर्फ एक ही आरोपी था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। युवक का सैम्पल कोरोना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही युवक की पहचान उजागर की जाएगी।’
यहां पुलिस अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच भी कर रही है। लेकिन बताया जा रहा है कि सीसीटीवी में 7 दिनों का वीडियो डिलीट कर दिया गया है। जिसके बाद अब पुलिस साइबर फॉरेंसिक टीम की मदद से फुटेज को दोबारा हासिल करने में जुटी हुई है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि इस अस्पताल की गिनती बिहार के बड़े अस्पतालों में होती है। लेकिन आरोप लगाए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इसकी जांच कराने तक की जरुरत नहीं समझी। इतना ही नहीं परिवार के मुताबिक उन्हें यह भी नहीं पता कि वार्ड में भर्ती महिला की कोरोना जांच कराई गई है या नहीं? या फिर उनकी रिपोर्ट भी आई है या नहीं?
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पीड़ित परिवार द्वारा एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की आंतरिक जांच शुरू करवाई है। इधर आरोपी अस्पताल कर्मी को फिलहाल आईसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

