कवि, कथाकार, नाटककार, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता, अपने देशकाल पर सजग और चौकस निगाह रखने और अपने सृजन से सार्थक हस्तक्षेप…
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अदालत में आखिरी दया याचिका खारिज होने के बाद से ही याकूब मेमन के लिए फांसी का फंदा तैयार करने…
लोकतंत्र का जिन चार खंभों पर टिका होना माना गया है, उनमें से प्रथम दो, कार्यपालिका और विधायिका जिस गत…
सुनील अमर विशिष्ट परिस्थितियों के कारण अब तक देश में चार बार प्रबल बहुमत की सरकारें बन चुकी हैं। ऐसी…
जयंत जिज्ञासु इंसान जन्म लेता है, मां की गोद से उतर कर चलना सीखता है, फिर जवान होकर वृद्धावस्था तक…
रामप्रकाश कुशवाहा मनुष्य ने राजनीति का जो तंत्र विकसित किया है, उस पर भी न्यूटन के गति जड़त्व के नियम…
निशांत सिंह नारायण मूर्ति का हाल ही में आया बयान काफी हद तक ठीक है कि पिछले कई दशकों में…
अशोक कुमार संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम और फिल्म ‘गब्बर इज बैक’ के प्रदर्शन…
सफलता तो अन्य परीक्षाओं में भी लोगों को मिलती हैं, लेकिन वे व्यक्तिगत उपलब्धियों तक ही सीमित हो जाती हैं।…
लेह (लद्दाख) की खूबसूरती को हिंदी की कई फिल्मों में उतारा गया है, वह चाहे ‘जब तक है जान’ हो…
सचमुच वे प्यारेलाल ही हैं। लंबा-चौड़ा कद, हमेशा हंसता-मुस्कराता चेहरा। तीखी और कड़क आवाज- ‘मलाई… कुल्फी’। मिनट भर में ढेरों…
आतिफ़ रब्बानी सेहतमंद और सुशिक्षित नागरिक ही किसी देश के विकास की जमानत होते हैं। अर्थशास्त्र की शब्दावली में इसे…