संजीव शर्मा पेशावर में एक सौ इकतीस स्कूली बच्चों के संहार के बाद उस दस साल की मासूम बच्ची ने…
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अरविंद दास भारतीय साहित्य और राजनीति की भाषा में गांव अभी भले जीवित हो, महानगरीय पत्रकारिता से गांव-देहात गायब हो…
मनोज कुमार आमतौर पर वाट्स-एप आदि पर लगातार आने वाले संदेश मुझे परेशान करते हैं। हर रोज बड़ी संख्या में…
कौशलेंद्र प्रपन्न प्रेमचंद, निराला, श्रीलाल शुक्ल, रेणु के गांव अब वही नहीं रहे। शहर की भीड़ और औद्योगीकरण ने गांव…
अनुज दीप यादव पिछले छह महीने के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्ववाद की पहचान रखने के साथ-साथ भारतीय जनता…
रिम्मी दिसंबर महीने की सोलह तारीख एक बार फिर इतिहास के पन्नों में एक तकलीफदेह रंग से भर चुकी है।…
मधुर राय पिछले दो-तीन सालों से एक के बाद एक आस्था के किले ढह रहे हैं। विश्वास के जो दुर्ग…
वीरेंद्र जैन केंद्र सरकार में मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के एक भाषण में प्रयुक्त शब्दों पर मचे हंगामे को भाजपा…
प्रियंका मेरे कमरे की ट्यूबलाइट अचानक बुझ गई थी। रविवार के दिन हॉस्टल का दफ्तर बंद रहता है। इसलिए मैं…
प्रशांत सिंह कभी-कभी सड़क पर चलते-चलते खयाल आता है और खयालों में ही पूरा महल खड़ा हो जाता है। उन…
अविनाश कुमार चंचल वह हमारी तरह ही किराए का कमरा खोजता, कॉलेज में किसी महिला मित्र को चिट्ठी लिखता, बस…