बिहार के चुनाव नतीजे आक्रामकता, अहंकार, असहिष्णुता के बरक्स सहिष्णुता, सद्भाव और समरसता के पक्ष में आए हैं। संवैधानिक और जीवन मूल्यों के समक्ष गंभीर चुनौतियों के इस दौर में बिहार के चुनाव परिणामों का सकारात्मक प्रभाव पूरे देश में दिखाई पड़ेगा। सत्ता, संसाधन और धनबल को नकारते हुए मतदाताओं ने जुमलेबाजों को स्पष्ट संदेश दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरी ताकत और ध्रुवीकरण के तमाम हथकंडों के बावजूद हार से विश्वास है कि केंद्र के स्तर पर नीतियों और परिस्थितियों का ईमानदार चिंतन- विश्लेषण का होगा। विकास के नारों और स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन, मेट्रो ट्रेन जैसी दिखावटी या विलासी प्राथमिकताओं को छोड़ भूख, गरीबी, कुपोषण, पानी, पर्यावरण, बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्याएं, महंगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

सबके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को गुणवत्तापूर्ण और वहनीय बनाने की दिशा में निर्णय लेकर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। देश के बड़े हिस्से में सूखे और कृषि संकट के मद्देनजर घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय प्रभावी पहल होगी।
सामाजिक सद्भाव और परस्पर विश्वास को ठेस पहुंचाने और नफरत-वैमनस्य फैलाने वालों के विरुद्ध ठोस तथा प्रभावी कार्रवाई होगी ताकि ऐसे व्यक्तियों और संगठनों को निरुत्साहित किया जा सके।

बिहार का चुनाव भाषा के संयम और गरिमा के निकृष्ट स्तर के लिए भी जाना जाएगा। यह एक उपयुक्त समय है जब चुनाव सुधार, सार्वजनिक जीवन में आचरण और भाषा की गरिमा तथा संयम के साथ संवैधानिक, मानवीय और जीवन मूल्यों की रक्षा और पुनर्स्थापना के लिए पूरे देश में वातावरण बनाने की जरूरत है।
’सुरेश उपाध्याय, गीतानगर, इंदौर</strong>