पहले ही पड़ोसी देश हमारे पीछे पड़े हैं। चीन और पाकिस्तान हमारे दोस्त नेपाल को उकसाने और अपनी खुराफाती हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इधर देश के अंदर कुछ नासमझ धार्मिक सद्भाव को बेवजह खत्म कर रहे हैं- अपने राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक के चक्कर में।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी यह देख कर चिंतित हुए और तुरंत उन्होंने देश को विरासत में मिली विविध संस्कृतियों-सभ्यताओं को संजोए रखने का देशवासियों से आह्वान किया, जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तहेदिल से स्वागत किया है। आज हमें देश में सद्भाव बनाए रखने के लिए देसी-विदेशी षड्यंत्रकारियों से चौकन्ना रहने की जरूरत है, ताकि अमन पर इनकी आंच न आने पाए और फिर कभी दादरी रूपी डाकन देश में कहीं भी लौटने न पाए।
शकुंतला महेश नेनावा, गिरधर नगर, इंदौर</strong>
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