अगर कहीं ईश्वर है चाहे किसी भी रूप में हो, किसी भी नाम से हो, वह दादरी कांड में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ते हुए दानिश को जरूर बचाए! आखिर कैसे वह अपने सामने इंसानियत को मरता देख सकता है! यह तो महज संयोग की बात है कि हम कहां जन्म लेते हैं। अगर अपने वश में होता तो सब किसी राजा-महाराजा या अरबपति के यहां जन्म लेते। मेरा ईश्वर ऐसा नहीं जो गोमांस खाने पर किसी की हत्या की इजाजत देता हो। अखलाक और दानिश की जगह मैं और आप भी हो सकते हैं शर्त बस इतनी है कि सामने वाली भीड़ किस समुदाय की है।
‘पीके’ और ‘ओ माई गॉड’ जैसी फिल्में केवल तारीफ और समीक्षा के लिए नहीं, कुछ सीखने के लिए बनाई जाती हैं। उच्च विकास दर के साथ उच्च मानवता का आदर्श भी स्थापित करने का प्रयास होना चाहिए तभी सही मायने में हम विकसित राष्ट्र हो पाएंगे। (अभिषेक, दिल्ली)
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