कारोबारी जगत में बुधवार शाम को काफी हल-चल देखने को मिली। जब 21 जनवरी शाम को इटरनल (पहले जोमैटो) के टॉप मैनेजमेंट में बड़े बदलाव की खबर आई। बता दें कि इटरनल ने बुधवार को अपने चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के साथ ही खबर दी कि इटरनल के को-फाउंडर ने कंपनी के ग्रुप सीईओ पद से रीजाइन कर दिया है। उनकी जगह इटर्नल के नए सीईओ अल्बिंदर ढिंडसा बनेंगे। ढींडसा के अपॉइंटमेंट को इटरनल लिमिटेड के बोर्ड ने मंगलवार को हुई मीटिंग में मंजूरी दी।

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कौन है अलबिंदर ढींडसा?

अल्बिंदर ढिंडसा दिग्गज प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के फाउंडर और सीईओ है। वे पहले से ही इटरनल का हिस्सा रहे हैं। अब वह इटरनल के सीईओ बनने जा रहे हैं। अल्बिंदर ढिंडसा ने 2000-2004 में आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की है। उन्होंने अपनी एमबीए की पढ़ाई साल 2010 से 2012 में की।

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शुरुआती सफर

ढींडसा एक दशक से ज्यादा समय से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। उन्होंने 2013 में ब्लिंकिट (पहले ग्रोफर्स) को को-फ़ाउंड किया था। उन्होंने 2021 में कंपनी को 10-मिनट ग्रोसरी डिलीवरी की ओर ले जाने में मदद की, जिससे कंपनी क्विक-कॉमर्स सेगमेंट में एक लीडर के तौर पर उभरी।

अपना वेंचर शुरू करने से पहले ढींडसा ज़ोमैटो का हिस्सा थे, जहां उन्होंने इंटरनेशनल एक्सपेंशन के हेड के तौर पर काम किया। वह IIT दिल्ली के एल्युम्नस हैं, जहां उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में कोलंबिया बिजनेस स्कूल में पढ़ाई की।

ढींडसा ने पहले कोलंबिया बिज़नेस स्कूल में अपने समय को एक शुरुआती दौर बताया था। इस प्रोग्राम ने उन्हें ग्लोबल बिज़नेस के नजरिए, एंटरप्रेन्योरशिप और लीडरशिप की सोच से रूबरू कराया। इस दौरान, उन्होंने UBS इन्वेस्टमेंट बैंक में एसोसिएट के तौर पर भी कुछ समय काम किया, जहां उन्हें फाइनेंशियल मार्केट और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी का एक्सपीरियंस मिला।

स्टार्टअप अनुभव, ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन और स्ट्रेटेजिक ग्राउंडिंग के कॉम्बिनेशन से अब ढींडसा की लीडरशिप को आकार मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वे ऐसे समय में इटरनल लिमिटेड का चार्ज संभाल रहे हैं जब फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स में कॉम्पिटिशन लगातार बढ़ रहा है।

2022 में जोमैटो ने खरीदा था ब्लिकिंट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जोमैटो ने 2022 में ब्लिकिंट को लगभग 568 मिलियन डॉलर में खरीदा। दीपिंदर ने खुद एक पुराने इंटरव्यू में माना था कि इंटीग्रेशन आसान नहीं था और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने ढिंडसा को ब्लिंकिट से हटाने तक पर विचार कर लिया था, लेकिन आज ब्लिंकिट, इटरनल ग्रुप का सबसे मजबूत बिजनेस बन चुका है।

कंपनी में संभालेंगे ये जिम्मेदारी

ढींडसा अब पूरे इटरनल ग्रुप के लिए जिम्मेदार होंगे, जिसमें जोमैटो का मुख्य फ़ूड डिलीवरी बिजनेस और ब्लिंकिट के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स ऑपरेशन शामिल हैं। उनकी यह तरक्की ग्रुप में ब्लिंकिट की बढ़ती अहमियत और ग्रोथ के एक मुख्य ड्राइवर के तौर पर इसकी भूमिका को दिखाती है।

यह अपॉइंटमेंट ढींडसा में मज़बूत भरोसे का भी संकेत देता है, जो 2022 में ज़ोमैटो द्वारा ब्लिंकिट को 568 मिलियन डॉलर में खरीदने के बाद ग्रुप में शामिल हुए थे। उस समय, इंटीग्रेशन की चुनौतियों ने मर्ज की गई कंपनी में लीडरशिप के ताल-मेल पर सवाल उठाए थे।

दीपिंदर गोयल क्यों लिया ये फैसला?

एक बयान में दीपिंदर गोयल ने कहा, ‘यह फैसला उनके उन आइडियाज की वजह से है, जिनमें काफी ज्यादा रिस्क और नए तरह के एक्सपेरिमेंट शामिल हैं। उनका मानना है कि ऐसे आइडियाज इटरनल की बिजनेस स्ट्रैटेजी और रिस्क फ्रेमवर्क के अंदर फिट नहीं बैठते, इस वजह से इन्हें किसी लिस्टेड कंपनी के दायरे में रहते हुए आगे बढ़ाना सही नहीं होगा।’

उन्होंने आगे कहा कि भले ही उनके पास दोनों काम संभालने की क्षमता है लेकिन भारत में पब्लिक कंपनी के सीईओ से जुड़ी कानूनी और अन्य जिम्मेदारियां इतनी ज्यादा होती हैं कि इसमें पूरा फोकस देना जरूरी होता है।

अलबिंदर ढींडसा की नेटवर्थ कितनी है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इटरनल के नए सीईओ अलबिंदर ढींडसा की अनुमानित नेट वर्थ लगभग 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारतीय रुपये में यह लगभग 10 हजार करोड़ रुपये है। वहीं, अगर बात करें इटरनल के पूर्व सीईओ दीपिंदर गोयल की तो उनकी नेटवर्थ फोर्ब्स के आंकड़ों के मुताबिक, 1.7 बिलियन डॉलर (भारतीय रुपये में लगभग 15 हजार करोड़ से ज्यादा) है।