सरकार ने तंबाकू और उसके उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (central excise duty) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें तंबाकू वाली सिगरेट और पाइप एवं सिगरेट के लिए इस्तेमाल होने वाले स्मोकिंग मिक्स्चर पर ज्यादा टैक्स बढ़ाने की योजना है। इस फैसले से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एक-दो महीने में जब वस्तु एवं सेवा कर (GST) मुआवजा उपकर (Goods and Services Tax Compensation Cess) अपनी उपयोगिता पूरी कर लेगा और खत्म हो जाएगा, तब भी इन उत्पादों पर समान टैक्स बना रहे और राजस्व में कमी न आए।
जनसत्ता के सहयोगी Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय इसी मकसद से सोमवार (1 दिसंबर, 2025) को लोकसभा में केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक 2025 पेश करेगा।
पान मसाला प्रोडक्शन पर नया ‘स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा’ उपकर (‘Health & National Security’ Cess)
इसके अलावा, सरकार सोमवार को लोकसभा में “हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025” भी पेश करेगी, जिसके तहत उन मशीनों या प्रक्रियाओं पर सेस लगाया जाएगा जिनके द्वारा निर्दिष्ट वस्तुओं का उत्पादन या निर्माण किया जाता है। इनमें पान मसाला भी शामिल है, चाहे उसका प्रोडक्शन मैन्युअली किया जाए या हाइब्रिड प्रोसेस के जरिए। यह उपकर दोहरे उद्देश्य पूरे करेगा- पहला, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करना और दूसरा- राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना।
सेस खत्म होने के बाद रेवेन्यू बनाए रखने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोत्तरी
नए एक्साइज बिल के अनुसार, सरकार ने 75 मिमी से ज्यादा लंबाई वाली फिल्टर सिगरेट के लिए मौजूदा 735 रुपये प्रति हज़ार स्टिक की जगह 11,000 रुपये प्रति हज़ार स्टिक की दर प्रस्तावित की है। वहीं, नॉन-फिल्टर सिगरेट (65–70 मिमी) पर उत्पाद शुल्क को 18 गुना बढ़ाकर 250 से बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति हज़ार स्टिक करने का प्रस्ताव है। पाइप/सिगरेट के लिए स्मोकिंग मिश्रण पर उत्पाद शुल्क मौजूदा 60% से बढ़ाकर 325% कर दिया जाएगा।
यह विधेयक तंबाकू उत्पादों पर मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों को बदलने का प्रयास करता है, जिन्हें 2017 में GST लागू होने के बाद से कम रखा गया था। केंद्रीय उत्पाद शुल्क दरों को इसलिए काफी कम किया गया था ताकि मुआवजा उपकर का बोझ जोड़ने पर कुल कर दर में बड़ा असर न पड़े।
मुआवजा उपकर को राज्यों को जीएसटी सिस्टम अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसके तहत राज्यों को जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद पांच वर्षों तक 14% वार्षिक राजस्व वृद्धि की गारंटी दी गई थी। इस मुआवजे के लिए और होने वाली कमी को पूरा करने के लिए, तंबाकू उत्पादों और कुछ मोटर वाहनों जैसे लग्जरी और ‘सिन’ गुड्स पर अभी भी उपकर लगाया जाता है।
यह उपकर मूल रूप से जून 2022 में खत्म होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को सहायता देने के लिए केंद्र द्वारा लिए गए ऋणों की अदायगी हेतु इसे मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया। माना जाता है कि मार्च 2026 से एक-दो महीने पहले ही उपकर से मिलने वाली राशि से ये सभी ऋण पूरी तरह चुका दिए जाएंगे।
सरकार ने कहा है कि कोविड-19 अवधि के दौरान लिए गए सभी कर्जों के चुकता होते ही तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर लगाया जाने वाला मुआवजा उपकर खत्म कर दिया जाएगा जिसकी उम्मीद मार्च 2026 तक है।
एक सरकारी सूत्र ने कहा, “यह संशोधन जरूरी है ताकि सरकार को तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाने के लिए वित्तीय गुंजाइश मिल सके और कर भार (टैक्स इंसीडेंस) सुरक्षित रखा जा सके।”
सितंबर 2025 में GST ढांचे को सरल बनाया गया था, जिसमें 5%, 12%, 18% और 28% की बहु-स्तरीय संरचना को घटाकर केवल दो स्लैब- 5% और 18% किया गया। जबकि तंबाकू और लग्जरी वाहनों जैसे डेमेरिट गुड्स पर 40% का स्पेशल टैक्स रखा गया। इस बदलाव से हर दिन के इस्तेमाल के सामानों की कीमतों में कमी आई और यह FMCG, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल जैसे कई सेक्टर्स के कुल 375 सामानों पर लागू हुआ। इन बदलावों को अधिकतर सामानों के लिए 22 सितंबर से लागू किया गया लेकिन तंबाकू उत्पादों को नई संरचना से बाहर रखा गया। इन उत्पादों पर अभी भी 28% GST के साथ-साथ उपकर और अन्य शुल्क लगाए जाते हैं।
नए “स्वास्थ्य/राष्ट्रीय सुरक्षा” विधेयक में उन मशीनों पर मंथली सेस लगाने का प्रस्ताव है जो 2.5 ग्राम तक से लेकर 10 ग्राम से अधिक वजन वाले प्रति मिनट 500 पाउच तक का प्रोडक्शन करती हैं। ऐसी मशीनों के लिए मासिक उपकर ₹1 करोड़ से ₹8.49 करोड़ तक होगा। जो मशीनें प्रति मिनट 501 से 1000 पाउच बनाती हैं, उन पर प्रति मशीन ₹2.02 करोड़ से ₹16.98 करोड़ तक मासिक उपकर लगेगा। इसी तरह, 1001–1500 पाउच और 1500 से अधिक पाउच प्रति मिनट बनाने वाली मशीनों पर उपकर की राशि और बढ़ जाएगी। पूरी तरह मैन्युअल प्रक्रिया के लिए मासिक उपकर ₹11 लाख प्रस्तावित है।
तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों व पान मसाला के अलावा, अब मुआवजा उपकर अन्य डेमेरिट गुड्स पर भी लागू है। इनमें कार्बोनेटेड और कैफीन युक्त पेय पदार्थ, निजी इस्तेमाल के लिए विमान और मनोरंजन या खेल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वेसेल्स शामिल हैं।
