EPFO New Rules: कई बार लोगों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) निकालने के नियम उलझन भरे हो जाते हैं। अलग-अलग शर्तें, वेटिंग पीरियड और छोटी-छोटी तकनीकी वजहों से क्लेम रिजेक्ट होना, ये सब काफी परेशान करता है। हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इन सब चीजों को ठीक करने के लिए पीएफ निकालने के नियमों को आसान बनाया है, जिससे सदस्यों के लिए जरूरत पड़ने पर अपना पैसा निकालना आसान हो गया है।

पिछले वर्ष अक्टूबर के आखिर में घोषित किए गए नए नियमों के तहत, EPFO ​​सदस्यों के लिए सभी पार्शियल विड्रॉल को एक ही आसान फ्रेमवर्क में लाया गया है।

पहले क्या थी समस्या?

जनसत्ता की सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, पीएफ विड्रॉल पहले 13 अलग-अलग प्रोविजन द्वारा कंट्रोल होते थे, जिनमें से हर एक की अपनी मिनिमम सर्विस की जरूरत थी। कारण के आधार पर, एक सदस्य को दो से सात साल के बीच सर्विस पूरी करनी होती थी, जिससे अक्सर कन्फ्यूजन होता था और क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे।

इसके अलावा, विड्रॉल ज्यादातर सिर्फ कर्मचारी के अपने योगदान और ब्याज तक ही सीमित थे, जो आमतौर पर 50% से 100% के बीच होता था। इससे, असली इमरजेंसी में भी फंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।

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अब क्या बदला है?

नए नियमों के तहत, सभी पार्शियल विड्रॉल प्रोविज़न को एक कॉमन सिस्टम में मिला दिया गया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि लगभग सभी तरह के विड्रॉल के लिए मिनिमम सर्विस पीरियड को सिर्फ 12 महीने कर दिया गया है।

इससे भी जरूरी बात यह है कि अब निकाली जाने वाली रकम में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान, साथ ही ब्याज भी शामिल है। यानी अब एक सदस्य कुल एलिजिबल पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक निकाल सकता है, जो पहले की तुलना में काफी ज्यादा है।

संक्षेप में, आप पहले से ज्यादा पैसा और बहुत पहले निकाल सकते हैं।

कब निकाल सकते हैं पीएफ बैलेंस का 100 फीसदी?

जनसत्ता की सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, 12 महीने की सर्विस पूरी करने के बाद, एक सदस्य 5 स्थितियों में एलिजिबल पीएफ बैलेंस का 100 फीसदी तक निकाल सकता है –

खुद या परिवार के मेडिकल इलाज के लिए

– एक फाइनेंशियल ईयर में तीन बार तक निकाला जा सकता है।

खुद या बच्चों की पढ़ाई के लिए

– पूरी PF मेंबरशिप के दौरान 10 बार तक अनुमति है।

खुद या बच्चों की शादी के लिए

– मेंबरशिप के दौरान पांच बार तक अनुमति है।

घर की ज़रूरतों के लिए ( खरीदना, बनवाना, होम लोन चुकाना आदि)

– मेंबरशिप के दौरान पांच बार तक अनुमति है।

खास परिस्थितियों में, जहां कोई खास कारण बताने की जरूरत नहीं है।

– एक फाइनेंशियल ईयर में दो बार तक अनुमति है।

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पीएफ बैलेंस का 25% क्यों बचाकर रख रहा है ईपीएफओ?

नए नियम विड्राल को आसान बना रहा है। वही, ईपीएफओ सदस्यों की रिटायरमेंट बचत को बचाने की भी कोशिश कर रहा है। डेटा से पता चला कि बार-बार निकासी से लंबी अवधि की सुरक्षा को नुकसान हो रहा था।

दरअसल, आधे पीएफ सदस्यों के पास फाइनल सेटलमेंट के समय उनके पीएफ अकाउंट में 20000 रुपये से कम थे और लगभग 75 फीसदी के पास 50000 रुपये से कम थे।

कई कम आय वाले कर्मचारियों को 8.25 फीसदी की लंबी अवधि के कंपाउंडिंग का फायदा नहीं मिला, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने बहुत बार पैसे निकाले।

इसे रोकने के लिए, ईपीएफओ ​​ने PF बैलेंस का 25 फीसदी सेफ्टी नेट के तौर पर बनाए रखना अनिवार्य कर दिया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सदस्यों के पास रिटायरमेंट के लिए कुछ पैसा बचा रहे।

नौकरी चली जाए तो क्या होगा?

बेरोजगारी के दौरान भी नियम लचीलापन देते हैं –

  • जनसत्ता की सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी (कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान के साथ-साथ ब्याज सहित) तुरंत निकाला जा सकता है। बाकी 25 फीसदी एक साल बाद निकाला जा सकता है।

कुछ मामलों में पूरे PF बैलेंस की पूरी निकासी (बचा हुआ 25% भी शामिल) की अनुमति है। इनमें 55 वर्ष के बाद रिटायरमेंट, स्थायी विकलांगता, छंटनी, स्वैच्छिक रिटायरमेंट या स्थायी रूप से भारत छोड़ना शामिल है।

क्या इससे आपकी पेंशन पर असर पड़ेगा?


नहीं, ये बदलाव कर्मचारी पेंशन योजना के तहत पेंशन लाभों को प्रभावित नहीं करते हैं। एक सदस्य 10 साल की सर्विस पूरी करने से पहले पेंशन जमा राशि निकाल सकता है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन पाने के लिए, कम से कम 10 साल की EPS मेंबरशिप अनिवार्य है।