विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र को इतिहास का सबसे छोटा सत्र करार दिया है और सरकार से इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की है। गुप्ता ने कहा कि यह केजरीवाल सरकार की सोची-समझी रणनीति है जिसके तहत छोटा सत्र रखा गया है ताकि विपक्ष सरकार की कमियों को उजागर न कर पाए और जनता के मुद्दों पर चर्चा न हो सके। इसके अलावा विपक्ष का आरोप है कि सरकार वित्त वर्ष 2015-16 के लिए आवंटित बजट का केवल 30 फीसद ही खर्च कर पाई है।
बजट सत्र की रणनीति तैयार करने के लिए सोमवार को भाजपा विधायक दल की एक बैठक हुई जिसमें ओम प्रकाश शर्मा के खिलाफ प्रस्तावितकार्रवाई के विरोध का भी फैसला लिया गया। विपक्ष की रणनीति की घोषणा करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भाजपा के सदस्य केजरीवाल सरकार को 45 ज्वलंत समस्याओं पर घेरेंगे और 14 विषयों पर चर्चा के लिए नोटिस दिया गया है।
हालांकि गुप्ता ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विपक्ष उसे घेर न पाए क्योंकि अगर सरकार बाद में सत्र की अवधि बढ़ाती है तो विपक्ष को नोटिस देने का समय नहीं मिलेगा जिससे प्राइवेट मेंबर बिल और अन्य अनुच्छेदों के अंतर्गत सरकार को घेरा नहीं जा सकता है।
गुप्ता ने कहा कि सरकार के इस प्रयास के बावजूद विपक्ष दिल्ली के विकास और दिल्लीवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार से पाई-पाई का हिसाब मांगेगी कि वह पुलों, डिस्पेंसरियों और पॉलीक्लिनिकों के निर्माण के खर्च में किस तरह पैसा बचा रही है और अगर करोड़ों रुपयों की बचत हो रही है तो फिर वैट क्यों बढ़ाया जा रहा है।
गुप्ता ने कहा कि पिछले बजट में वैट वसूली का लक्ष्य 24 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किया गया था, इसे संशोधित कर 21 हजार करोड़ रुपए किया गया, इसके बावजूद सरकार अभी भी 2000 करोड़ रुपए पीछे है। गुप्ता का आरोप है कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है। विपक्ष सरकार पर विज्ञापन में होने वाली फिजूलखर्ची को घटाने के लिए दबाव बनाने की तैयारी में भी है।
