Budget Expectations: बजट 2026 पेश होने में कुछ ही दिन बाकी है। ऐसे में बजट की तैयारियां जोरो पर है। इस बार केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का यूनियन बजट पेश करेगी। बजट पेश होने की तारीख नजदीक आते ही सभी सेक्टर्स को बजट को लेकर काफी उम्मीदें होती है। क्रिप्टो सेक्टर को भी बजट को लेकर उम्मीदें है।

पिछले बजट में क्रिप्टो और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को लेकर सरकार ने कोई बड़ा टैक्स बदलाव नहीं किया। हालांकि, टैक्स कानून में संशोधन का प्रस्ताव देकर क्रिप्टो लेन-देन की रिपोर्टिंग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम उठाया गया। अब क्रिप्टो सेक्टर को बजट से टीडीएस की घटाने की उम्मीद है।

पिछले बजट में क्रिप्टो को लेकर क्या हुआ ऐलान?

अगर हम आपसे बजट 2025-26 की बात करें तो इसमें क्रिप्टो पर 30% टैक्स (capital gains tax) जारी रहा यानी लाभ पर 30% टैक्स जैसा पहले था वो वैसा रही रखा गया। इसके अलावा, 1 फीसदी TDS/TCS (ट्रांजैक्शन पर टैक्स कटौती) भी बजट 2025 में जारी रखा गया। सरकार ने सिर्फ क्रिप्टो/वर्चुअल डिजिटल एसेट लेन-देन की रिपोर्टिंग जरूरी करने के लिए टैक्स कानून में संशोधन का प्रस्ताव दिया।

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टीडीएस को 1% से घटाकर 0.01% लाने की उम्मीद

CoinDCX के को-फाउंडर सुमित गुप्ता ने कहा, ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट सेक्टर स्वाभाविक रूप से राहत की उम्मीद कर रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि मौजूदा टैक्स सिस्टम लागू हुए चार साल हो गए हैं। अब लिए गए फैसले इनोवेशन को तेजी से बढ़ा सकते हैं और भारत को ग्लोबल Web3 और VDA लीडर के तौर पर उभरने में मदद कर सकते हैं। आगे का रास्ता ऐसे प्रैक्टिकल सुधारों में है जो यूजर्स को कंप्लायंट प्लेटफॉर्म पर वापस लाएं और साथ ही कंप्लायंस को भी मजबूत करें। एक जरूरी पहला कदम नियमों में क्लैरिटी लाना और सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए TDS प्रावधानों को एक समान लागू करना है, जिससे कंप्लायंस बेहतर होगा और नियमों का बेहतर पालन करके संदिग्ध, नॉन-कंप्लायंट ऑपरेटर्स से नागरिकों की सुरक्षा बढ़ेगी।’

सुमित गुप्ता ने आगे कहा, ‘ टीडीएस को 1% से घटाकर 0.01% करने से मॉनिटरिंग बनी रहेगी, जबकि ऑफशोर माइग्रेशन का मुख्य कारण खत्म हो जाएगा, जिससे यूजर्स को भारतीय प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए बढ़ावा मिलेगा और सरकारी निगरानी में ट्रांजैक्शन की विज़िबिलिटी बहाल होगी। 30% कैपिटल गेन टैक्स को इनकम टैक्स स्लैब के साथ अलाइन करने, साथ ही Web3 वेंचर्स के लिए लॉस ऑफसेटिंग और स्टैंडर्ड बिजनेस डिडक्शन की अनुमति देने से एक स्थिर, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी जो भारत में जिम्मेदार इनोवेशन को सपोर्ट करेगा।’

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लॉस सेट-ऑफ की अनुमति

Giottus Crypto के सीईओ विक्रम सुब्बुराज के अनुसार, ”बजट 2026 को पॉलिसी के एक कम देखे गए पहलू पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें कंप्लायंस को मुख्य फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में पहचाना जाए जो यह तय करता है कि मार्केट देश के अंदर काम करते हैं या देश के बाहर चले जाते हैं।अगर भारत बड़े पैमाने पर FIU-अलाइन, ट्रेस करने योग्य क्रिप्टो मार्केट बनाना चाहता है, तो पारदर्शिता अवॉइडेंस से ज्यादा किफायती होनी चाहिए। अभी, ट्रांजैक्शन-लेवल की दिक्कतें बिना निगरानी को मजबूत किए व्यवहार को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, 1% TDS ज्यादातर लिक्विडिटी पर बोझ बना है, न कि एक प्रभावी निगरानी सिस्टम के तौर पर। एक सही कमी से ऑडिट ट्रेल्स बने रहेंगे, साथ ही वैध ट्रेडिंग एक्टिविटी घरेलू प्लेटफॉर्म पर वापस आ सकेगी।’

विक्रम सुब्बुराज ने आगे कहा, ‘टैक्स सिमेट्री भी उतनी ही जरूरी है। वर्चुअल डिजिटल एसेट कैटेगरी में लॉस सेट-ऑफ की अनुमति देने से यह सुनिश्चित होगा कि टैक्सेशन कुल टर्नओवर के बजाय नेट आर्थिक नतीजों को दिखाए। व्यापक फ्रेमवर्क रेगुलेटरी स्पष्टता, कंज्यूमर प्रोटेक्शन, और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट और सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग के बीच साफ अंतर जरूरी है। अगर इन्हें एक साथ लागू किया जाए, तो ये उपाय भारत के रेगुलेटेड इकोसिस्टम के भीतर एक्टिविटी, लिक्विडिटी और कंप्लायंस को एक साथ लाकर टैक्स बेस का विस्तार करेंगे।’

[डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से निवेश सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। Jansatta.com अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।]