Budget 2026: केंद्रीय बजट पेश होने में कुछ ही दिन बाकी है। इस बार 1 फरवरी को वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट पेश करेंगी। अगर हम यूनियन बजट की बात करें तो यह देश का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज है, जो न केवल देश की मौजूदा आर्थिक हालात बताता है, बल्कि भविष्य का खाका तैयार करने में भी काफी अहम भूमिका निभाता है।
बजट के दिन सभी निगाहें इस बात पर होती है कि सरकार क्या ऐलान करने वाली है। बजट में कई ऐसे शब्द होते है इसको अर्थ पता नहीं होता है। अगर आप की भी बजट में नजर है और इसे अच्छी तरह जानने-समझने के लिए उन शब्दों के अर्थ जानना जरूरी है, जिनका इस्तेमाल इनमें किया जाता है।
वित्त विधेयक (Finance Bill)
कानूनी विधेयक के तौर पर संसद में पेश किया गया वह प्रस्ताव, जिसके जरिए सरकार नए टैक्स लगाने, पुराने टैक्स या टैक्स स्ट्रक्चर में किसी तरह का बदलाव करने के लिए संसद की मंजूरी हासिल करना चाहती है। वित्त विधेयक के रूप में तैयार किया गया यह प्रस्ताव सिर्फ लोकसभा में ही पेश किया जाता है।
वित्त विधेयक का लोकसभा में पास होना उस सरकार का कायम रहने के लिए काफी जरूरी है। अगर वित्त विधेयक लोकसभा में रिजेक्ट हो जाता है तो उसे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होना माना जाता है। इसके बाद सरकार गिर जाती है।
प्रत्यक्ष कर (Direct Taxes)
प्रत्यक्ष कर ऐसे टैक्स हैं, जो व्यक्तियों, कंपनियों या संस्थाओं की आमदनी पर लगाए जाते हैं। प्रत्यक्ष कर सीधे सरकार के पास जमा कराने होते हैं। इसके मुख्य उदाहरण इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स हैं।
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes)
यह कर वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और बिक्री जैसी आर्थिक गतिविधियों पर लगाए जाते हैं। उत्पाद कर, वस्तु एंव सेवा कर और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट पर लागू कस्टम ड्यूटी इनडायरेक्ट टैक्स के प्रमुख उदाहरण हैं।
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विनिवेश (Disinvestment)
सरकार जब अपने स्वामित्व (मालिकाना हक) वाली किसी सरकारी कंपनी की हिस्सेदारी आंशिक रूप से या फिर पूरी तरह बेच देती है, तो इस प्रोसेस को विनिवेश कहा जाता है।
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)
राजकोषीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) का शाब्दिक अर्थ है, “राजकोष यानी सरकारी खजाने को होने वाला घाटा।” केंद्र सरकार के बजट के मामले में इसका मतलब ये है कि सरकार का कुल खर्च, उसकी कुल आमदनी के मुकाबले कितना अधिक है। खर्च और आय का ये अंतर जितना ज्यादा होगा, राजकोषीय घाटा भी उतना ही ज्यादा होगा।
राजस्व घाटा (Revenue Deficit)
जब सरकार के रोजमर्रा के खर्च (जैसे सैलरी, ब्याज, पेंशन आदि) उसकी आमदनी (टैक्स और दूसरी आय) से ज्यादा हो जाते हैं, तो उसे रेवेन्यू डेफिसिट (राजस्व घाटा) कहते हैं।
