जनसत्ता संवाददाता
केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि आज इनकी हालत इतनी खराब है कि ये दिल्ली विधानसभा में शून्य के आंकड़े तक पहुंच चुकी कांग्रेस के आगे गठबंधन के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के गठबंधन होने की सूरत में भी भाजपा दिल्ली की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज करेगी और केंद्र में फिर से अपनी हुकूमत कायम करेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से राजधानी की खातिर 46 हजार करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में चाहे किसी की सरकार हो लेकिन उससे विकास की गतिविधियों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
‘जनसत्ता बारादरी’ में शिरकत करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि उनकी यह दिली ख्वाहिश है कि लोकसभा के आगामी चुनाव में दिल्ली में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के बीच चुनावी गठबंधन हो जाए। इन दोनों को एक साथ हराने में जो सियासी मजा आएगा वह अलग-अलग हराने में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस व आम आदमी पार्टी अलग-अलग लड़ेंगे तो लोग कहेंगे कि वोट बंट जाने की वजह से भाजपा जीत गई। लिहाजा, यह अच्छा होता कि इन दोनों दलों के बीच समझौता हो जाता। उन्होंने कहा कि विडंबना देखिए कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जिस कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ दिन-रात आवाज उठाकर सत्ता हासिल की, वे आज उसी कांग्रेस के सामने चुनावी गठबंधन के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व केजरीवाल के समक्ष भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रह चुके हर्षवर्धन ने जानना चाहा कि क्या केजरीवाल वह दिन भूल गए जब वे इन्हीं शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे थे और दावा किया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दीक्षित के खिलाफ उनके पास ट्रक भर कर सबूत हैं। आज उन्हीं शीला दीक्षित के सामने वे गठबंधन के लिए हाथ पसारे खड़े हैं, इससे बड़ी अवसरवादिता और क्या हो सकती है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर बीते चार सालों के कार्यकाल में कोई भी काम कर पाने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि दिल्ली में हमारी सरकार नहीं है, फिर भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उन्होंने राजधानी के विकास से संबंधित 46 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दिलवाई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने चार साल का कार्यकाल केंद्र से लड़ाई-झगड़े में ही निकाल दिया।
