नंदनवन में एक हरे-भरे सघन वृक्ष पर चिड़ा-चिड़िया रहते थे। उनके तीन छोटे बच्चे – एक भाई और दो बहनें – दिन में दूर-दूर तक के सुहावने दृश्य देखते और हंसी-मजाक भरी बातों में पूरा दिन बिताते। इन बच्चों के माता-पिता जंगल में कुछ दूर नदी किनारे जाकर भोजन सामग्री जुटाते। बच्चे अभी कुछ बड़े और समझदार होने ही लगे थे कि उनकी मां की दुर्घटना में मौत हो गई। मां के बिना बच्चे दुखी रहने लगे। पिता भी अपने बच्चों के साथ दुख भरे दिन काटने लगा।
समय बदलते देर नहीं लगती। एक दिन चिड़ा अपने बच्चों को खिलाने के लिए दाना लेकर पास के गांव से खुशी-खुशी लौटा। उस दिन वह अकेला नहीं था। साथ में एक सुंदर सी चिड़िया भी थी, जो बच्चों की नई मां बनी। पूरे परिवार के दिन फिर से खुशी भरे कटने लगे। अभी कुछ समय बीता था कि चिड़िया का पहली बार अपने बच्चों की मां बनने का वक्त आ गया। चिड़ा खुश होकर सोचने लगा कि बच्चों को नए भाई-बहनों के संग खेलने का अवसर मिलेगा।
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इधर जब पड़ोसियों को चिड़िया के मां बनने की बात मालूम हुई तो वे उसके मन में बच्चों के प्रति कटुता भरने लगे। चिड़िया को भी अपने होने वाले बच्चों की सुविधा में ये बच्चे रुकावट लगने लगे। अब वह हर दिन इन बच्चों को दूर करने की योजना बनाने लगी। इस कारण वह उदास रहने लगी। इधर बच्चों को भी मां का प्यार मिलना बंद हो गया। चिड़ा की भी चिड़िया की उदासी अखरने लगी, पर वह इसका कारण समझ नहीं पाया।
आखिर वह दिन आ गया, जब चिड़िया ने चिड़ा से कहा कि वह बच्चों को जंगल में छोड़ आए। चिड़ा ने चिड़िया की कटुतापूर्ण बातें सुनी और उसे बड़ा दुख हुआ। उसे अपनी पहली पत्नी की याद आई, जो अपने बच्चों से कितना प्यार करती थी। चिड़िया रोज ही बच्चों को लेकर अपने परिवार के सुखी वातावरण में जहर घोलने लगी। एक दिन चिड़िया ने चिड़ा को धौंस दे डाली – ‘यदि कल सुबह तक इन बच्चों को दूर जंगल में नहीं ले जाओगे तो मैं घर से सदा के लिए चली जाऊंगी।’ चिड़ा मजबूर हो गया।
अगला दिन बच्चों के जीवन में भूचाल लाने वाला था। चिड़ा ने तीनों बच्चों को जंगल जाने के बहाने अपने साथ लिया। बच्चों को क्या पता था कि जंगल जाने की खुशी उनके जीवन में एक अनचाहा दुख घोल देगी। जंगल में कुछ छोटे-बड़े वृक्ष थे। जमीन पर दूर-दूर तक हरी और लंबी बेलें फैली पड़ी थीं। पूरे वातावरण में हरियाली छाई हुई थी। यहां आकर बच्चे खुश हो गए।
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बच्चों को पिता की प्रतीक्षा करते लंबा समय हो गया। आंधी के साथ बारिश होने लगी और बिजली कड़ने लगी। बच्चे डर गए। पास में एक विशाल छायादार वृक्ष मिला। तीनों भाई-बहन वहां सुरक्षित स्थान पर चले गए। भाई ने बहनों को समझाया कि धीरज रखें, सुबह का इंतजार करें। सच में अगले दिन की सुबह उनके जीवन में खुशहाली बन कर आई। पास के नीम के पेड़ पर एक चिड़िया रही। उसने देखा कि दो दिन पहले ही उसका काला लंबा सांप तीनों बच्चों को खा रहा था।
चिड़िया नीम के पेड़ से उड़कर बच्चों के पास गई। उसने प्यार जताकर कहा – ‘बच्चों! मैं भी अकेली रहती हूं। अब तुम मेरे साथ मेरे बच्चों की तरह रहो और मैं तुम्हारी मां की तरह।’ बच्चों ने खुशी से कहा – ‘हमारी मां! हमारी मां!’ चिड़िया अपने साथ उन बच्चों को एक सुंदर बगीचे में ले गई। वहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। मां का प्यार पाकर धीरे-धीरे तीनों बच्चे बड़े हो रहे थे। वे मां के साथ आनंदमय जीवन जीने लगे। अब वे उड़ना और मुसीबतों का सामना सीख रहे थे।
