jansatta story

दुनिया मेरे आगेः चिठिया हो तो

आज ई-मेल और कूरियर के जमाने में भी डाकिये का महत्त्व कम नहीं हुआ है। अपने इस जीवन में तरह-तरह के डाकियों से काम पड़ा है। कुछ डाकिये निहायत ईमानदार, कर्तव्यपरायण और कुछ बिल्कुल विपरीत।

दुनिया मेरे आगेः नागरिक का दायित्व

कुछ दिन पहले सुबह छह बजे दिल्ली में गोल मार्केट से राजीव चौक मेट्रो स्टेशन तक पैदल ही चला आ रहा था। सोचा, सुबह-सुबह तो शहर यातायात की रेलमपेल और लोगों की भीड़भाड़ से मुक्त होकर शांत-सुंदर लग रहा होगा।

दिल्ली मेरी दिल्लीः खींच लाई लालसा

यमुना किनारे आयोजित संस्कृति महोत्सव में इतने लोग कैसे जुटे होंगे और ये कौन लोग हैं? इस बारे में एकबुद्धिजीवी से पूछा तो उनका कहना था कि आध्यात्म मध्यवर्ग की जरूरत की चीज है।

राजपाटः मसीहा की हकीकत

खुद को गरीब गुरबा का मसीहा समझते हैं लालू यादव। तभी तो न किसी आलोचना की परवाह करते हैं और न नुक्ताचीनी की। कोई कुछ भी कहे, कहता है तो कहता रहे। लालू वही करेंगे जो उन्हें भाएगा।

कहानीः संकल्प

छुट्टी होते ही सभी बच्चे स्कूल से ऐसे भागे जैसे किसी पिंजरे से निकल पक्षी खुले आकाश में घूमने जा रहे हों। धीरे-धीरे पूरा स्कूल खाली होता गया।

देशभक्ति को सम्मान

हाल में सिने अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार को दादा साहेब फाल्के सम्मान देने की घोषणा हुई है।मनोज कुमार देशप्रेम से ओत-प्रोत फिल्में बनाने के लिए मशहूर रहे हैं। इस मौके पर उनके फिल्मी करिअ‍ॅर पर रोशनी डाल रहे हैं अभिजीत राय।

कहानीः पीले पत्ते

राजेश्वर की नींद तो न जाने कब की खुल चुकी थी। खिड़की का परदा सरका कर देखा तो बाहर अंधेरा था। आ कर फिर बिस्तर पर लेट गए। लेकिन, नींद नही आ रही थी।

मुक्ति आंदोलन और महिलाओं की हिस्सेदारी

देश की आजादी की लड़ाई रही हो या पुरुषों के साथ बराबरी का मामला, महिलाओं ने हर आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। इसके बावजूद राजनीति हो या समाज या दूसरा कोई क्षेत्र-महिलाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया है। अतीत के आईने में स्त्री-आंदोलनों का एक लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रही हैं निवेदिता।

राजनीतिः जीवन मरण का वैश्विक प्रश्न

बेलगाम आर्थिक विकास आज हमें उस मोड़ पर ले आया है जहां जल्द ही हमारा सामना दो डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म दुनिया से होगा। ग्लोबल वार्मिंग का संबंध कई वैज्ञानिक समुद्री तूफानों के बार-बार आने से जोड़ते हैं। बढ़ते प्रदूषण और अंधाधुंध दोहन से बिगड़ चुकी तटीय पारिस्थितिकी इन तूफानों को झेलने में और भी अक्षम साबित होती है।

संपादकीयः चुनावी बिसात

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुदुच्चेरी के लिए चुनावी गहमागहमी पहले ही शुरू हो गई थी। निर्वाचन आयोग ने इन चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के लिए चुनावी तारीखों की घोषणा कर दी है।

राजनीतिः बैंक की बीमारी का निदान

एनपीए वसूल नहीं होने या उसमें हो रही देरी के पीछे वजह यह भी है कि राजनीतिक लोग यह तय करते हें कि बैंकों को कैसे चलाया जाए। बैंक स्वायत्तशासी नहीं हैं। जब तक राजनेताओं, व्यावसायिक घरानों और बैंकों का गठजोड़ बना रहेगा, बैंकों को बढ़ते एनपीए की समस्या से छुटकारा दिलाना आसान नहीं होगा।
सारा खेल राजनीतिक दखल का है।

राजपाट : नीकु का मखौल

सूझबूझ के मामले में अव्वल माने जाते हैं नीकु। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके करीबी अब उसी तर्ज पर नीकु कहने लगे हैं जैसे नरेंद्र मोदी को उनके समर्थकों ने नमो बनाया।

गदर में शहीद शहादत

छह दिनों तक टनों बर्फ के नीचे दबे लांसनायक हनुमनथप्पा के बहादुर दिल के धड़कते रहने की खबर ने देश के करोड़ों दिलों की धड़कनों को एक कर दिया था।

राजनीतिः दफ्न होते पर्यावरण

जिन सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में इंसान नहीं पहुंच सकता, वहां एक नन्ही-सी चिड़िया अपनी चोंच में कुछ दाने दबाए पहुंच जाती है और धरती पर बिखेर कर उसे हरे-भरे पेड़ों से सजा देती है। उसी का नतीजा है जो हम प्रकृति में हरियाली देख प्रफुल्लित होते हैं। विडंबना यह है कि जाने-अनजाने आज हम पक्षियों के सबसे बड़े दुश्मन बन बैठे हैं।

लोकजीवन के चटक रंग

भोपाल में पिछले दिनों लोकरंग महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें कई तरह के रंगारंग कार्यक्रम संपन्न हुए। इसकी एक झलक प्रस्तुत कर रही हैं शशिप्रभा तिवारी।
इस वर्ष यह समारोह सोलह शृंगार की अवधारणा पर आधारित था। सोलह शृंगार पर आधारित प्रदर्शनी ‘नायिका’ में शृंगार के विविध अवयवों को प्रदर्शित किया गया था।

मकबरा हो मंदिर, गर्व से उठ जाता सिर

उत्तर औपनिवेशिक भारतीय इतिहास में दो तरह की शक्तियों के बीच संघर्ष जारी है। एक इतिहास को ज्यादा से ज्यादा विज्ञान सम्मत बनाने की कोशिश में है तो दूसरी खुद इतिहास को मिथक सिद्ध करने की कोशिश में।

राजनीतिः उन्नत बनाम पारंपरिक

खेती-किसानी के अनेक नुस्खे भारत के गांवों में बेकार पड़े हुए हैं। ये हमारे समृद्ध हरित अतीत का प्रमाण तो हैं ही, प्रासंगिक और कारगर भी हैं। अब यह बात सारी दुनिया मान रही है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान के इस्तेमाल से कृषि की लागत घटाई जा सकती है। यह खेती
का सुरक्षित तरीका है, साथ ही
इससे उत्पादन भी बढ़ेगा।

चौपालः बंद होते स्कूल

मध्यप्रदेश सरकार ‘युक्तियुक्तकरण’ के नाम पर एक लाख बीस हजार स्कूलों में से एक लाख आठ हजार स्कूल बंद करने और बाकी बचे बारह हजार स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने के प्रस्ताव पर अमल करने की तैयारी में है।