US deportation, human trafficking, donkey route
तवलीन सिंह की खरी बात: अमेरिकी सपने की कड़वी हकीकत, लाखों खर्च कर गए थे, हथकड़ियों में लौट आए

डोनाल्ड ट्रंप का चुनावी वादा था कि वे अवैध तरीकों से अमेरिका आने वालों को राष्ट्रपति बनते ही बाहर निकालेंगे…

P. Chidambaram Blog, Dusri Nazar,
चिदंबरम का करारा वार – ऐसा राजनीतिक बजट कभी नहीं देखा, अर्थव्यवस्था को संभालने में बुरी तरह फेल सरकार

चुनावों के बाद, 23 जुलाई, 2024 का मोदी-सीतारमण का पहला बजट बहुत नीरस था। इसमें हमेशा की तरह बहाने बनाए…

Sudhish Pachauri column
सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर: दिल्ली चुनाव का ड्रामा, महाकुंभ का रोमांच और ‘जहरीली यमुना’ का सस्पेंस!

चैनल बताते रहते हैं कि अमावस्या के दिन साढ़े सात करोड़ ने ‘आस्था की डुबकी’ लगाई है और अब तक…

जनसत्ता ब्लॉग, Jansatta Blog
Ravivari Blog: काम की दुनिया में महिलाओं की धाक, मैन्युफैक्चरिंग से टेक्नोलॉजी तक बढ़ रही भागीदारी

पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले कार्यक्षेत्रों में महिला प्रशिक्षुओं की बढ़ती मांग हर स्तर पर स्त्री-पुरुष के…

Tavleen Singh Sunday Column
तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्ज: केजरीवाल की साख दांव पर- दिल्ली चुनाव में टूटती उम्मीदें और बिखरते सपने

जैसे-जैसे दिल्ली में मतदान का दिन पास आ रहा है, वैसे-वैसे केजरीवाल घबराए और परेशान से लगने लग गए हैं।…

Ravivari Stambh, P. Chidambaram Column Dusri Nazar
पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: समान नागरिक संहिता- कानून की प्रयोगशाला या केंद्र और उत्तराखंड की सियासी चाल

उत्तराखंड सरकार ने भले समान नागरिक संहिता बनाई है, मगर हकीकत यही है कि केंद्र सरकार उत्तराखंड के कंधों पर…

जनसत्ता प्रश्नकाल: बिहार में किसी के नेतृत्व में चुनाव न लड़े कांग्रेस, नीतीश की साख खराब

भारत की दलगत संसदीय राजनीति में निर्दलीय नेताओं की अपनी भूमिका है। ये अपना जनाधार अपने निजी काम और छवि…

Sudhish Pachauri column
सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर: दिल्ली चुनाव, सैफ का विवाद और आहत भावनाओं का दौर, क्या इस बार भावनाओं की राजनीति हावी?

अब तक सामने आई खबरें बताती हैं कि इस बार दिल्ली का चुनाव अपेक्षाकृत अधिक खुला कवरेज पा रहा है।…

Rakesh Sinha ka Blog, Ravivari Stambh
Blog: डायरी और चिट्ठी- क्या लेखनी से फिर जागेगी आत्मसंघर्ष और मौलिकता की परंपरा?

हम जब कुछ लिखते हैं तो स्वयं से संघर्ष करते हैं। मन-मस्तिष्क में द्वंद्वात्मक भाव रहता है। फिर यथार्थ को…

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्ज: बड़ा सवाल- क्या देशभक्ति और राष्ट्रवाद का फर्क समझने का आ गया है वक्त?

राष्ट्रवाद इतना तंगनजर है कि पिछले दशक में अचानक हमें दिखने लगे हैं ऐसे लोग, जो खुल कर कहते हैं…

Ravivari Stambh, P. Chidambaram Column Dusri Nazar
पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: बजट से उम्मीदें या मोहभंग? अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात पर बड़ा सवाल

सरकार ने कारपोरेट समर्थक और मित्रतावादी पूंजीपतियों की समर्थक होने का ‘टैग’ हासिल कर लिया है। कारपोरेट मुनाफा 2022-23 में…

जनसत्ता ब्लॉग, Jansatta Blog
Blog: योग की भूमिका और भक्ति का सवाल, भारतीय समाज में संस्कृति और स्वतंत्रता की तलाश

लोकचित्त को समझने और उसमें प्रवेश करने के लिए योग की भूमिका गहरे सूत्रों-संकेतों और संभावनाओं से युक्त है। पर…

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