प्रतिस्पर्धा के इस दौर में कई बार पढ़ाई और नौकरी में मनचाहे अवसर नहीं मिल पाते।
चातुर्मास के शास्त्रीय विधानों का मूल उद्देश्य मनुष्य को त्याग और संयम की शिक्षा देना भी है।
जीवन का रहस्य भोग में नहीं, बल्कि दूसरों के सहयोग में है।
दुनिया में अधिकतर लोग अपने जीवन के लक्ष्य निर्धारित करते हैं लेकिन सभी अपने लक्ष्यों तक नहीं पहुंचते हैं।
मुखौटे लगाकर हम लगातार स्वयं को तो धोखा देते ही हैं, दूसरों को भी धोखा देने की कोशिश करते हैं।
जब हम किसी भी काम को चुनौती बना लेते हैं तो वह आसानी से पूरा हो जाता है।
जिंदगी में सब कुछ उजला नहीं होता। कुछ कालिमा भी होती है। कुछ धुंधलका भी होता है।
अपने जीवन में हर व्यक्ति कई बार विफल होता है लेकिन इस विफलता की वजह से हमें अपने लक्ष्यों तक…
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