शायद ही कुछ लोग जानते हों कि एक कौवा, जिसे हम रोज अपनी छत और मुंडेर पर बैठा देखते हैं…
किसी शुभ अवसर पर अगर किसी के यहां जाना हो, तो हमारा प्रयास होता है कि उपहार में उसको किताबें…
भारत में ग्रामीण मेलों का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्त्व है।
कवि हरिवंशराय बच्चन ने लिखा था कि ‘इस पार प्रिये मधु है, तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा’,…
अति विशिष्ट तथा विशिष्ट व्यक्तियों के काफिले में आगे-पीछे दौड़ने वाले वाहनों के प्रदूषण फैलाने का जिक्र कहीं नहीं सुनाई…
कहते हैं, दूसरों की गलतियां देखना बहुत आसान है, लेकिन अपनी भूल देखने के लिए नजर और नजरिया दूसरा चाहिए।
समय के साथ चीजें, आदतें बदलती हैं और शौक भी बदलते हैं। कभी आपसी बातचीत का अपना सुख होता था।…
पिताजी किस तरह से बड़े परिवार को पाल लेते, इस बीच कई बार दुश्वारियां भी आतीं, पर वे हिम्मत नहीं…
गांव में किसी के भी घर बहन-बेटियां ससुराल से आतीं, तो उनका सुख सुन हम सब फूल कर कुप्पा हो…
रेल यात्रा कर रहा था। सुबह-सुबह एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी। यात्री प्लेटफार्म पर खाद्य सामग्री लेने उतर गए।
आज सुबह ही मकान की छत पर बंदरों का एक झुंड आकर बैठ गया।