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दुनिया मेरे आगे: एक बार गुस्सा और क्रोध को छोड़कर देखें, खुशियों और आनंद से भर जाएगा जीवन, खुद बनाएं स्वभाव का सांचा

अगर किसी व्यक्ति का स्वभाव झगड़ालू है, तो आमतौर पर सब लोग उससे दूरी बनाकर चलते हैं। अगर वह व्यक्ति…

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दुनिया मेरे आगे: आत्मज्ञान की शुरुआत है समस्याओं का जश्न मनाना, सितारे अंधेरे में चमकते हैं, आपकी कहानी भी है खास

किसी दिन हम यह पता लगा लेंगे कि अपनी समस्याओं को कैसे हल करना है और आखिरकार उस स्थान पर…

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दुनिया मेरे आगे: क्या भारतीय ज्ञान परंपरा में छिपा है बेहतर भविष्य का राज, समझें वेदों और उपनिषदों की गहराइयों में छिपे रहस्य

भविष्य में जीवन को श्रेष्ठ और सुंदर कैसे बनाया जाए, यह हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा में छिपा हुआ है। नई…

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दुनिया मेरे आगे: कला का असली लक्ष्य, सौंदर्य से आगे संदेश और बदलाव तक पहुंचने की चुनौती

कला मानक विश्वासों को चुनौती देती है। यह संवाद को प्रोत्साहित कर आलोचनात्मक प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। पर हमने…

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दुनिया मेरे आगे: खुश और आनंद में रहना है तो प्रशंसा के साथ आलोचना को भी स्वीकारें, आत्मबल से तय करें अपनी राह!

कोई हमारी आलोचना करता है तो वह स्थिति मंथन करने की होती है। यह सोचने की जरूरत होती है कि…

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दुनिया मेरे आगे: आत्मज्ञान की यात्रा का रहस्य, अपने भीतर छिपे खजाने को जानें

हमारे अंतर्जगत में क्षमताओं एवं संभावनाओं का एक अमूल्य कोष छिपा हुआ है, लेकिन हम अपने संपूर्ण जीवन में बाहरी…

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दुनिया मेरे आगे: भारतीय समाज में वृद्धों की उपेक्षा और जीवन के अंतिम चरण की चुनौतियां

वृद्धों का दूसरा संसार यों तो हमेशा से रहा है, पर वर्तमान में यह संसार अधिक दुखदायी, त्रासद और कष्टमय…

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दुनिया मेरे आगे: गुरु की राह या गूगल की शरण, क्या डिजिटल युग में सिर्फ जानकारी तक सिमट रहा है सीखना?

हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी गुरु-शिष्य परंपरा है, जिसकी साख अनुशासन और सम्मान पर टिकी है। सहजता जैसी…

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दुनिया मेरे आगे: भागदौड़ भरी जिंदगी में शोर से दूर मौन की शक्ति, आत्म-चिंतन के जरिए आंतरिक शांति और संतुलित जीवन की ओर

आज की तेज-तर्रार जिंदगी में हर कोई दौड़ में शामिल है, मौन ही वह ठहराव है, जो हमें सही दिशा…

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दुनिया मेरे आगे: क्यों जरूरी है नए रिश्तों की तलाश? दोस्ती की गहराई और नई पहचान की हर उम्र में अहमियत, चलते रहना बेहतर

गहराई वक्त के साथ आती है, लेकिन रिश्तों में शुरुआती निवेश की फसल को ही व्यक्ति अक्सर भुनाता रहता है।…

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दुनिया मेरे आगे: खोखले रिश्ते, नशे में डूबी भीड़ और इंसानियत से दूर होती आधुनिक सोच, पुस्तकों को भुलाकर सोशल मीडिया बना नई मंजिल

अगर हम बाहर की यात्रा को भूलकर एक बार अंदर की यात्रा करें तो सत्य कितने खराब रूप में प्रकट…

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दुनिया मेरे आगे: इंसानियत की पहचान, क्या आपकी संवेदनशीलता को छूता है यह सवाल

यह मान लेना कि केवल हम ही किसी खास काम को सही तरीके से कर सकते हैं, वास्तव में एक…

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