विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर जेैव विविधता और पर्यावरण विशेषज्ञों से बातचीत।
2050 की पृथ्वी: जल, जलवायु और जैव-विविधता संकट के बीच मानव सभ्यता का भविष्य | विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस पर डॉ. वंदना शिवा, पद्मश्री उमा शंकर पांडेय, डॉ. रूपेंद्र सिंह, प्रशांत सिन्हा और डॉ. बीरबल झा…

रिटायरमेंट के बाद खर्च कैसे चलेंगे? महंगाई, पेंशन की कमी और मध्यमवर्ग की बढ़ती चिंता
रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा डर: जब वेतन रुक जाता है, लेकिन महंगाई नहीं, तब शुरू होती है असली आर्थिक चुनौती

रिटायरमेंट के बाद नियमित आय रुकने और महंगाई बढ़ने से मध्यमवर्गीय लोगों के लिए खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा…

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की फीचर इमेज।
डीके शिवकुमार: बेंगलुरु का रिसॉर्ट और वह आधी रात, जिसने बदल दी सियासी पहचान | किस्सा मुख्यमंत्री का

कनकपुरा से निकलकर कर्नाटक की राजनीति के केंद्र तक पहुंचे डीके शिवकुमार की राजनीतिक यात्रा कई दिलचस्प किस्सों और नाटकीय…

नदी किनारे मुशायरे में शायरी सुनते लोगों का पोस्टर, जिस पर 'अदब, अल्फाज और यादों का शहर' लिखा है।
इरशाद! यह प्रयागराज है जनाब, जहां कभी शहर ‘वाह-वाह’ में बसता था और शायरी में सांस लेता था | संगम तीरे

चाय की भाप में घुलती गजलें, ‘मुकर्रर अर्ज है’ की सदाएं और ‘वाह-वाह’ में बसता एक शहर! जनसत्ता के विशेष…

उदंत मार्तंड: न विज्ञापन, न निवेशक, न पाठकों का बाजार | भारत का पहला मीडिया स्टार्टअप, जिसने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी

पंडित जुगल किशोर शुक्ल का उदंत मार्तंड हिंदी पत्रकारिता में केवल एक आरंभिक समाचार पत्र नहीं था, बल्कि अपने समय…

बकरीद: 15 करोड़ पशुधन, करोड़ों का बाजार और प्रशासनिक व्यवस्था - एक पूरा सिस्टम कैसे चलता है
जब गांव की अर्थव्यवस्था, शहर की व्यवस्था और सरकारी डेटा एक साथ सक्रिय हो जाते हैं | बकरीद

यह विश्लेषण स्पष्ट करता है कि यह त्योहार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शहरी प्रबंधन और पर्यावरणीय नियमन – तीनों स्तरों पर एक…

पुराने इलाहाबाद के सिनेमाहालों, फिल्मी पोस्टरों, टिकट खिड़कियों की भीड़ और टेंपो से होते प्रचार को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।
अमिताभ बच्चन के शहर में सिनेमा का वह दौर, जब फिल्में हर गली तक पहुंचती थीं | संगम तीरे

टिकट खिड़कियों पर उमड़ती भीड़, टेंपो से गूंजता फिल्मी प्रचार, ‘हाउसफुल’ के बोर्ड और रात तक गुलजार रहते सिनेमाहाल… यह…

पेड़ों की ओट में खड़े क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को चारों तरफ ब्रिटिश पुलिस ने घेर लिया था। लेकिन आजाद को वे पकड़ नहीं सके।
पेड़ों की ओट में खड़े आजाद, चारों तरफ अंग्रेजी पुलिस… अल्फ्रेड पार्क की उस आखिरी सुबह की कहानी | संगम तीरे

यह कहानी उस सवाल को उठाती है कि आखिर आजाद ने आत्मसमर्पण क्यों नहीं किया। उस दौर में गिरफ्तारी का…

सूर्यास्त की रोशनी में चमकता रोम का कोलोसियम, सामने पीएम नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीर।
रोम का Colosseum: पत्थरों में कैद एक ऐसा इतिहास, जो आज भी दुनिया को रोमांचित करता है

कोलोसियम अपने समय की इंजीनियरिंग का चमत्कार था। इसकी लंबाई लगभग 189 मीटर और चौड़ाई 156 मीटर थी। ऊंचाई लगभग…

केरल विधानसभा की पृष्ठभूमि में वी.डी. सतीशन और पिनराई विजयन की राजनीतिक टकराव दर्शाती फीचर इमेज, जिस पर ‘किस्सा मुख्यमंत्री का’ लिखा है।
“न पुराने विजयन से डरे, न आज के…” केरल विधानसभा के उस एक बयान ने कैसे बदल दी सतीशन की तकदीर | किस्सा मुख्यमंत्री का

जनसत्ता की चर्चित शृंखला ‘किस्सा मुख्यमंत्री का’ के तहत आज पेश है केरल के मुख्यमंत्री बने वी.डी. सतीशन की कहानी।…

अक्टूबर 2001 में एन. रंगासामी पहली बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री बने।
सादगी, चुप्पी और सत्ता: पुडुचेरी के सीएम रंगासामी की राजनीति का फॉर्मूला | किस्सा मुख्यमंत्री का

जनसत्ता की पुडुचेरी चुनाव विशेष शृंखला ‘किस्सा मुख्यमंत्री का’ में हम आपके लिए पेश कर रहे हैं पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों…

"संसोपा ने बांधी गांठ, पिछड़े पावें सौ में साठ” नारे ने 60–70 के दशक में पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी की राजनीति की नींव रखी
प्रयागराज में कैसे तैयार हुई सामाजिक न्याय की राजनीति की जमीन, शहर की वैचारिक विरासत की कहानी | संगम तीरे

प्रयागराज का इलाहाबाद विश्वविद्यालय एक समय उत्तर भारत की गैर-कांग्रेसी राजनीति की सबसे सक्रिय प्रयोगशालाओं में गिना जाता था। उत्तर…

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