कोरोना की वजह से करीब 14 महीने से आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से नहीं चल पा रही हैं। ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों में कई बार लॉकडाउन लगाया जा चुका है। इसका नतीजा ये हुआ कि लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी तो वहीं कई नौकरीपेशा की सैलरी में भी कटौती की गई। हालांकि, इस हालात के बावजूद लोग बचत पर जोर दे रहे हैं। ये संकेत डीमैट अकाउंट के आंकड़ों से मिल रहे हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े: आंकड़े बताते हैं कि ब्रोकरेज कंपनियों ने पिछले साल अप्रैल से 31 मई 2021 तक हर महीने औसतन 13 लाख नए डीमैट खाते खोले हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2021 तक बाजार में खुदरा निवेशकों की कुल संख्या 6.97 करोड़ हो गई है। बीएसई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि ब्रोकरेज कंपनियों और शेयर बाजारों ने पिछले 14 महीनों के दौरान हर महीने 12 से 15 लाख नए डीमैट खाते खोले हैं। इनमे से चालीस प्रतिशत डिमैट खाते बीएसई से जुड़ी ब्रोकरेज कंपनियों द्वारा खोले गए।
आशीष कुमार चौहान ने कहा, ‘‘बीएसई ने पिछले 15 महीनों में सभी सदस्यों के लिए कुल मिलाकर लगभग 40 प्रतिशत अधिक निवेशक खाते जोड़े हैं। निवेशकों के खातों में बढोत्तरी दर्शाता है कि ऑटोमेशन और मोबाइल ट्रेडिंग से स्टॉक और म्यूचुअल फंड में निवेश देश के हर हिस्से में पंहुच गया है।’’ (ये पढ़ें-जानिए PF अकाउंट में बैलेंस चेक करने का तरीका)
किस राज्य का क्या हाल: बीएसई के अनुसार 31 मई तक देश में कुल 6.9 करोड़ डीमैट खाते थे। जिसमें से 25 प्रतिशत खाते महाराष्ट्र से जबकि 85.9 खाते गुजरात से हैं। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश से 52.3 लाख , तमिलनाडु 42.3 लाख और कर्नाटक से 42.2 लाख का नंबर है। इसके अलावा बंगाल से 39.5 लाख, दिल्ली से 37.3 लाख, आंध्र प्रदेश से 36 लाख, राजस्थान से 34.6 लाख, मध्य प्रदेश से 25.7 लाख, हरियाणा से 21.2 लाख, तेलंगना से 20.7 लाख, केरल से 19.4 लाख, पंजाब से 15.2 लाख और बिहार से 16.5 लाख डीमैट खाते हैं।
डीमैट क्या है: आपको बता दें कि एक खाता जहां कोई अपने शेयर रख सकता है और उसकी सुरक्षा इलैक्ट्रॉनिक तरीके से होती है उसे डीमैट खाता कहते हैं। अगर आपको भारत में शेयर बाजार से शेयर खरीदना या बेचना है तो डीमैट का विकल्प चुनना पड़ता है। सेबी के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक साल से अधिक समय के लिए उपयोग नहीं किये जाने वाले डीमेट खातों को असक्रिय माना जाता है।
