योगी आदित्यनाथ अपने आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनके दिए बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं। योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने से पहले गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 1998 में पहली बार गोरखपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था उसके बाद ही उन्होंने लगातार सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा।

सीएम योगी को राजनीति में लाने वाले उनके गुरु अवैद्यनाथ थे। देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ ही योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत भी हैं। गोरखनाथ मंदिर के महंत होने के कारण विपक्षी पार्टियां अक्सर उन पर तमाम प्रकार के आरोप लगाती हैं। एक बार योगी आदित्यनाथ से एक इंटरव्यू के दौरान सवाल पूछा गया था कि आप गोरखनाथ मंदिर के महंत है। वहां से जो आपको ताकत मिलती है उसका इस्तेमाल करके आप लोकसभा में चुनाव जीतते हैं? इसका जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि, ‘ इस देश के अंदर बहुत सारे ऐसे सन्यासी होंगे जो राजनीति में आए होंगे और कुछ समय के बाद वापस चले गए होंगे। हम जनता के बीच में रहकर उनके साथ संवाद स्थापित करके राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज किए हुए हैं।’

उनके इस जवाब पर एंकर ने एक दूसरा सवाल पूछा कि आप ऐसे अकेले संत है जिसने लगातार पांच बार चुनाव जीता है। दूसरा कोई साधु इतना चुनाव नहीं जीत पाया? उसका जवाब देते हुए गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मेरे गुरु भी चार बार से गोरखपुर के सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा एक सन्यासी का मतलब किसी गुफा में बैठकर मंत्र जपने मात्र से नहीं है। इस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि मुझे लगता है कि अगर मैं उत्तर प्रदेश में हूं यहां की पार्टी समाजवादी पार्टी डॉ लोहिया के बनाए रास्ते पर नहीं चलती है। अगर उन्होंने सही से काम किया होता तो यूपी में इतनी अराजकता नहीं होती। उन्होंने राम मनोहर लोहिया का जिक्र करते हुए कहा था कि, ‘ लोहिया ने कहा है कि राजनीति एक अल्पकालिक धर्म है और धर्म एक दीर्घकालिक राजनीति है।’

आपको बता दें कि यह इंटरव्यू इंडिया टीवी के शो ‘आप की अदालत’ में हो रहा था। जिसमें एंकर रजत शर्मा ने उनसे सवाल पूछा था कि गोरखपुर में जो मियां बाजार है आप उसको माया बाजार बनाने जा रहे हैं। इस पर हंसते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उसका नाम माया बाजार ही है। मियां बाजार बाद में हुआ है वह पहले मायाबाजार ही था।

बता दें कि 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले मुगलसराय स्टेशन का नाम बदल दिया था। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन रख दिया गया। उसके बाद से ही शहरों के नाम बदलने की प्रथा शुरू हो गई थी। इसी क्रम में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया था। वहीं राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने से पहले योगी सरकार ने फैजाबाद का नाम अयोध्या कर दिया था।