2-3 जुलाई की रात कानपुर के चौबेपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार अपराधी विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया है। इस एनकाउंटर में चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है। कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार ने मीडिया को बताया कि कानपुर पुलिस लाइन से करीब 15किलोमीटर पहले जैसे ही गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, विकास दूबे घायल पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने लगा। पुलिस ने कई बार उसे सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में विकास दूबे को सीने और कमर में गोली लगी। फायरिंग में उसकी मौत हो गई।

विकास दूबे को एक दिन पहले ही गुरुवार 9 जुलाई को मध्य प्रदेश पुलिस ने उज्जैन में महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के 24 घंटों के अंदर ही विकास दूबे के एनकाउंटर पर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स दो खेमों में बंटे दिख रहे हैं।

कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि विकास दूबे के साथ यही होना चाहिए था। इन लोगों का कहना है कि पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर बढ़िया किया है।

 

वहीं दूसरी तरफ तमाम ऐसे यूजर्स हैं जो इस एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे लोगों में कई राजनेता भी शामिल हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया कि दरअसल विकास दूबे वाली कार नहीं पलटी..ये राज खिलने से सरकार पलटने से बचाई गई है।

पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए लोग लिख रहे हैं कि विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद देश के सारे न्यायाधीशों को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। भाजपा के ठोक दो राज में अदालत की ज़रूरत ही नहीं है। कुछ यूजर्स ने सिस्टम पर तंज कसते हुए लिखा- विकास दूबे ने शहीद होके कितने पुलिसवालों की और राजनेताओं की जान बचा ली। अगर ज़िंदा रहता तो कितनो की पोल खोलता।

 

बता दें कि जबसे विकास दूबे फरार हुआ था तब से ही इस तरह की बातें सोशल मीडिया में चल रही थीं कि पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं करेगी बल्कि एनकाउंटर कर देगी। गुरुवार को जब वुकास की गिरफ्तारी हुई तब से भी लोग यही लिख रहे थे कि कभी भी इसका एनकाउंटर हो सकता है।