उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के लिए एक ओर जहां पीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी में डेरा डाले हुए हैं। वहीं अखिलेश यादव, राहुल गांधी व मायावती ने भी पूर्वांचल में आखिरी दांव खेला है। सोशल मीडिया पर भी लड़ाई कम रोचक नहीं है। ट्विटर पर मुख्‍य रूप से लड़ाई सपा-कांग्रेस व भाजपा के बीच है। दोनों तरफ से रोज किसी न किसी हैशटैग को ट्रेंड कराकर लाइमलाइट हासिल करने की कोशिश की जाती है। ऐसे ही सोमवार (6 मार्च) को ‘#मोदी_के_खोखले_वादे’ ट्रेंड करने लगा। इस हैशटैग के जरिए नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए जा रहे वादों का मजाक उड़ाया जा रहा है। पिछले दिनों गैर-सब्सिडी रसोई गैस सिलेंडर का दाम बढ़ाने को लेकर भी कुछ यूजर्स ने सरकार को ताना मारा है। कई यूजर्स ने नोटबंदी को लेकर भी नरेंद्र मोदी सरकार पर कटाक्ष किए हैं। लोकसभा चुनाव 2014 के प्रचार के दौरान मोदी द्वारा किए गए पुराने वादे याद दिलाकर भी केंद्र सरकार पर तंज कसे जा रहे हैं।

कई लोगों ने इसी हैशटैग के साथ पीएम मोदी पर चुटकी भी ली है। एक ने लिखा है, ”मोदी जी का कहना है उन पर कोई दाग नहीं है अरे दिन में 5 बार जो कपड़े बदलेगा उस पर दाग कैसे दिखेगा भाई।” राजवीर ने कहा, ”#मोदी_के_खोखले_वादे बुरे दिनों में नकली नोट पाकिस्तान से आते थे अच्छे दिनों में SBI के ATM से ..” कुछ यूजर्स ने कार्टून भी शेयर किए हैं। गोपीचंद ने कटाक्ष करते हुए कार्टून ट्वीट किया है, जिसपर लिखा है, ”देख मोदी जी सचमुच में फ़कीर हैं तेरे लिए दिल्ली छोड़कर रोड पर आ गए हैं।” एक अन्‍य यूजर ने लिखा है, ”भाई मान गए अखिलेश यादव जी को, दो महीने से मोदी को विदेश नही जानें दिया।”

https://twitter.com/GopichandKumaw2/status/838678348373045248

https://twitter.com/RaytaFailGaya/status/838676062573842432

https://twitter.com/bilal_motorwala/status/838669129070571520

https://twitter.com/mahipat_khuman/status/838667413008879616

अर्थव्‍यवस्‍था पर रिसर्च करने वाली कई एजेंसियों ने भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई है। वित्तीय सेवा कंपनी नोमूरा का अनुमान है कि भारत में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति अगले तीन माह तक बढ़ेगी और वर्ष 2017 में थोक महंगाई की औसत दर 4.4 प्रतिशत के आस पास रहेगी। वर्ष 2016 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति औसतन 2 प्रतिशत थी। जनवरी में थोक मुद्रास्फीति बढ़ कर 5.2 प्रतिशत पर पहुंच गयी जबकि दिसंबर में यह 3.4 प्रतिशत थी। यह उछाल उस समय दिख रहा है जबकि बाजार नोटबंदी से प्रभावित था।