महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव को लेकर शिवसेना और बीजेपी पूरी तरह खुलकर सामने आ गए हैं। दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ खुल कर बोल रही हैं। बीएमसी को लेकर दोनों पार्टियों का 25 साल पुराना गठबंधन टूट चुका है। बीएमसी के लेकर अपनी पहली रैली में ही उद्धव ठाकरे ने बता दिया इस बार दोनों पार्टियों कड़वाहट काफी गहरी है। उन्होंने कहा कि, ‘भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि यह एक दोस्ताना मुकाबला है जबकि राज्य के नेताओं ने इसे ‘कौरवों’ और ‘पांडवों’ के बीच का ‘महाभारत’ बताया है। मैं अमित शाह से कहना चाहता हूं कि अब यह दोस्ताना मुकाबाला नहीं है। आपने अपना एक ऐसा कट्टर समर्थक खो दिया है जिसने हमेशा आपका समर्थन किया है। उस समर्थक ने गुजरात दंगों के बाद मोदी का भी समर्थन किया था जबकि उस समय हर कोई उनके खिलाफ था।’

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इससे पहले भी उद्धव ने विभिन्न राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि ‘‘नाकाम’’ वादों और नोटबंदी का प्रभाव पांच राज्यों के चुनावी नतीजों पर होगा जहां लोग ‘‘बदलाव’’ के पक्ष में हैं। पार्टी के अपनी सहयोगी भाजपा के साथ तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। शिवसेना मुंबई में स्थानीय निकाय चुनाव अकेले दम पर लड़ रही है। पार्टी ने कहा कि इन विधानसभा चुनावों के नतीजे देश की राजनीति में बदलाव की शुरूआत होंगे। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में लिखा कि 2014 के लोकसभा चुनाव और आज के माहौल में काफी अंतर है। इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे नोटबंदी और नाकाम वादों को लेकर मतदाताओं के मोहभंग को परिलक्षित करेंगे। पार्टी ने कहा कि नाकाम वादों से लोगों के सपने टूटे हैं और इससे नतीजे प्रभावित होंगे।

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