तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर्व पर लगी रोक पर ट्विटर यूजर्स के निशाने पर रिवावार को जानवारों के अधिकारों के लिए काम करने वाला संगठन पेटा आ गया। ट्विटर यूजर्स ने पेटा को हिंदू विरोधी करार देते हुए बकरा ईद पर होने वाले पशु हत्या के समय चुप रहने पर प्रश्व खड़ा किया। दरहसल शीर्ष अदालत ने सबसे पहले साल 2014 में इस खेल पर यह कहते हुए बैन लगाया था कि यह जानवरों के प्रति क्रूरता है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लगाई गई राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए अपना आदेश बरकरार रखा था। वहीं राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी एआईएडीएमके ने कहा कि मुख्यमंत्री इस बारे में एक्शन लेंगे। पार्टी नेता सीआर सरस्वती ने कहा कि अम्मा (जयललिता) को जल्लीकट्टू बहुत पसंद था। हम केंद्र सरकार से इस मामले में समर्थन की मांग करते हैं।

यह है जल्लीकट्टू ?

जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक परंपरागत खेल है, जिसमें बैल को काबू में किया जाता है। यह खेल काफी सालों से तमिलनाडु में लोगों द्वारा खेला जाता है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति का पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है। इस खास मौके पर जल्लीकट्टू के अलावा बैल दौड़ का भी काफी जगहों पर आयोजन किया जाता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि जल्लीकट्टू तमिल शब्द सल्ली और कट्टू से मिलकर बना है। जिनका मतलब सोना-चांदी के सिक्के होता है जो कि सांड के सींग पर टंगे होते हैं। बाद में सल्ली की जगह जल्ली शब्द ने ले ली ।

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