आयोध्या विवाद मंगलवार को एकबार फिर सुर्खियों में गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को संवेदनशील और भावनात्मक बताते हुए इसे कोर्ट से बाहर आपसी समझौते से सुलझाने की अपली की। इस मुद्दे पर मंगलवार को दिनभर राजनीति गर्माई रही। मुद्दे से जुड़े अलग अलग पक्ष ने अपनी बात रखी। भाजपा नेता सुब्रह्मणयम स्वामी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की। स्वामी ने कहा कि इस मामले को छह साल से भी ज्यादा समय हो गया है और इस पर जल्द से जल्द सुनवाई किए जाने की जरूरत है। सांसद ने अदालत को बताया कि उन्होंने मुसलिम समुदाय के सदस्यों से बात की थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले को हल करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने मंगलवार को सुझाव दिया कि अयोध्या मुद्दे को सुलझाने के लिए राममंदिर रामजन्मभूमि पर जबकि मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बननी चाहिए। उन्होंने यहां कहा, हम हमेशा तैयार थे। मंदिर और मस्जिद बनाए जाने चाहिए लेकिन मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बननी चाहिए। रामजन्मभूमि पूरी तरह से राम मंदिर के लिए होनी चाहिए। स्वामी ने दलील दी कि सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों में मस्जिद ऐसा स्थल मानी जानी है जहां नमाज पढ़ी जाती है और दुआ कहीं भी मांगी जा सकती है। उन्होंने कहा, मेरा सुझाव यह है कि मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बननी चाहिए और रामजन्मभूमि राम मंदिर के लिए होनी चाहिए। हम राम का जन्मस्थल नहीं बदल सकते, लेकिन मस्जिद कहीं भी बनाई जा सकती है। भाजपा नेता ने कहा कि वे चाहते हैं कि शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर एक मध्यस्थ का नाम सुझाए और उन्होंने आशा जताई कि इस बारे में फैसला 31 मार्च तक हो जाएगा। इस मुद्दे पर टीवी चर्चा के दौरान सुब्रह्मणयम स्वामी और असदुद्दीन ओवैसी के बीच गर्मागर्म बहस हो गई। औवेसी ने खुद को बाबर का प्रवक्ता मानने से मना कर दिया तो वहीं उन्होंने स्वामी के लिए डीएनए जांचने की दुकान खोलने की भी बात कही।
#RamMandirRumble
Hear out what @Swamy39 & @asadowaisi have to say on the idea of making hospital in the disputed land in Ayodhya. #NewsToday pic.twitter.com/kltZRJLz84— IndiaToday (@IndiaToday) March 21, 2017
#RamMandirRumble
Can't a Mandir & Masjid be build at same place as gesture of communal harmony? Hear out @Swamy39 & @asadowaisi's arguments. pic.twitter.com/HshfOvpBU4— IndiaToday (@IndiaToday) March 21, 2017
अदालत के सुझाव से संघ सहमत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अयोध्या मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए करने के सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव का स्वागत किया और कहा कि इसे जल्द सुलझाया जाना चाहिए और सभी की भागीदारी से एक भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए। आरएसएस के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने यहां कहा, हम न्यायालय के सुझाव का स्वागत करते हैं…आरएसएस ने हमेशा ही इस संवेदनशील मुद्दे को अदालत के बाहर सुलझाने या इसके समाधान के लिए एक कानून का समर्थन किया है। आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारी यहां आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में हिस्सा लेने आए हैं। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आरएसएस की निर्णय करने वाली शीर्ष निकाय है। तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा मंगलवार को समाप्त हुई। होसबोले ने कहा कि हालांकि संघ मुकदमे में सीधे तौर पर शामिल नहंी है, वह धर्मसंसद की ओर से किए गए किसी भी निर्णय का समर्थन करेगा जिसने रामजन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व किया।
#RamMandirRumble
Question of faith is there all over the world: @Swamy39 #NewsToday https://t.co/4fqxBVUizL pic.twitter.com/HbUULnGxuJ— IndiaToday (@IndiaToday) March 21, 2017
योगी, आडवाणी ने किया स्वागत
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, मैं आशा करता हूं कि न्यायालय की सलाह के आलोक में सभी पक्ष सहमति पर पहुंचेंगे और राममंदिर मुद्दे को सुलझाने के लिए हल खोजेंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कदम का स्वागत किया है। आदित्यनाथ ने कहा, यह एक स्वागत योग्य कदम है। संसद भवन के बाहर मुख्यमंत्री ने कहा, हम इसका स्वागत करते हैं और दोनों पक्षों को अपने मतभेद सुलझा कर इसका हल निकालता चाहिये। उन्हें राज्य सरकार से जो भी सहयोग चाहिए, हम वह करेंगे। अयोध्या में राममंदिर का निर्माण उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के घोषणा पत्र में भी शामिल था।
