रामनवमी के मौके पर मध्य प्रदेश के खरगोन में हुई हिंसा के बाद शिवराज सिंह चौहान एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार को दंगा आरोपियों के मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। छोटी मोहन टाकीज क्षेत्र में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती के बीच आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर चला दिया गया। हालांकि सोशल मीडिया पर लोग इस कार्रवाई को ठीक नहीं बता रहे हैं।
एसपी को लगी गोली, 10 पुलिसकर्मी घायल: दरअसल रविवार को रविवार को रामनवमीं के अवसर पर जब शोभायात्रा निकाली गई तो इसी दौरान साम्प्रदायिक विवाद हो गया था। इस विवाद में दंगाईयो ने पथराव किया। साथ ही आगजनी की घटनायें भी हुई थी।रात 3 बजे तक अलग-अलग इलाकों में हिंसा चलती रही। गोली लगने से खरगोन के एसपी सिद्धार्थ चौधरी और 10 पुलिस कर्मी घायल हो गये थे।
लोगों की प्रतिक्रियाएं: अकमल काजी नाम के यूजर ने लिखा कि ‘सालों लग जाते हैं एक घर बनाने में, इन्हें शर्म तक नहीं आती बुल्डोजर चलाने में।’ रवि नाम के यूजर ने लिखा कि ‘आरोपियों को सजा देने का काम भी सरकार कब से करने लगी?’ हानिया अंसारी नाम के यूजर ने लिखा कि ‘हिंसा दोनों तरफ से हुई पर भाजपा सरकार में सजा एक धर्म विशेष को मिलेगी।’
शाब नाम के यूजर ने लिखा कि ‘इतनी त्वरित कर्यवाही, न कोर्ट न कचहरी…लगता है न्यायालयों की आवश्यकता 2025 तक नहीं रहेगी और जज भी बन जाएंगे आत्मनिर्भरl’ पुष्पेन्द्र नाम के यूजर ने लिखा कि ‘घर बहुत मेहनत से बनता है।’ अब्दुल सत्तार नाम के यूजर ने लिखा कि ‘एक दिन में किस तरह जांच कर ली गई? किस तरह ये डिसीजन ले लिया गया? क्या देश में कोई न्यायपालिका भी है? या सिर्फ भाजपा नेता ही जज बन चुके हैं?’
गोविंद सिंह नाम के यूजर ने लिखा कि ‘अब आगे से पत्थर फेंकना तो दूर, पत्थर को हाथ लगाने से पहले 100 बार सोचेंगे?’ आरपी त्रिपाठी नाम के यूजर ने लिखा कि ‘क्या बुलडोजर ही एक मात्र उपाय बचा है?’ पवन जालान नाम के यूजर ने लिखा कि ‘क्या देश की सर्वोच्च अदालत की नजर में यह कानूनी रूप से सही है?’
युसूफ नाम के यूजर ने लिखा कि ‘कोर्ट, कचहरी, अदालतें, न्याय के मंदिर क्या बंद हो गए मेरे इस देश में? जो इस तरह बेगुनाह बेकसूर गरीब लोगों के आशियानों को सरेआम उजाड़ा जा रहा है और कोई बोल नहीं रहा है।’ संदीप सिंह ने लिखा कि ‘करौली में कांग्रेस की वजह से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।’
