नए कृषि कानूनों को लेकर पिछले करीब महीने भर से किसान आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली की सीमाओं पर किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। किसान संगठनों औऱ सरकार के बीच कई राउंड की बातचीत अबतक बेनतीजा है। वहीं सरकार और बीजेपी की तरफ से किसानों और नए कृषि कानों को लेकर खूब बयानबाजी हो रही है। ऐसे ही एख बयान में कहा गया है कि बिहार में 2006 में ही मंडी सिस्टम समाप्त हो गया था जिसके कारण वहां के किसान अब अमीर हो गए हैं।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने बीजेपी की तरफ से इस तरह के दावों को गलत बताते हुए लिखा है कि  मंडी ख़त्म होने से बिहार का किसान अमीर हुआ यह ऐतिहासिक झूठ है। रवीश कुमार ने लिखा- बेशक भाजपा इस बात पर गर्व कर सकती है कि बिहार का किसान उसे ही वोट करता है लेकिन वह यह साबित नहीं कर सकती है कि 2006 में बिहार में मंडी समाप्त कर बिहार का किसान अमीर हो गया। बिहार के किसानों को गेहूं और धान का दाम नहीं मिलता है। मक्का और दाल का भी नहीं मिलता है।अगर वहां मंडी होती तो कुछ प्रतिशत ही सही किसानों को MSP तो मिलती। लेकिन मंडी समाप्त करने के बाद MSP की हर संभावना समाप्त हो गई।

रवीश कुमार ने आगे लिखा- किसानों को अपने दरवाज़े पर ही कम दाम में धान गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्हें पता ही नहीं चला कि मंडी ख़त्म कर कैसे उन्हें ग़रीब बनाने का रास्ता खोल दिया गया ताकि वे खेती छोड़ कर दूसरे शहरों की तरफ़ पलायन करें और सस्ते दर में मज़दूरी के लिए उपलब्ध हो सकें।

रवीश कुमार आगे लिखते हैं कि, ‘बिहार की ज़मीन उर्वर है। सिंचाई की भी ख़ास समस्या नहीं है। इसके बाद भी 2006 से लेकर अब तक इस कृषि प्रधान राज्य में निजी निवेश नहीं आया। आधा-अधूरा उदाहरण देकर बिहार के किसानों को समृद्ध बताने की कोशिश हो रही है। बिहार के किसानों का पंद्रह साल में कितना नुक़सान हुआ है अगर हिसाब निकाला जाए तो उसकी ग़रीबी का कारण पता चल जाएगा। वह ये नहीं जानता है कि मंडी ख़त्म कर बर्बाद होने के बाद बीजेपी को वोट क्यों करता है, हो सकता है उसके लिए दूसरे कारण भी हों लेकिन यह कहना कि मंडी ख़त्म होने से बिहार का किसान अमीर हुआ यह ऐतिहासिक झूठ है। मंडी ख़त्म होने से वह उन व्यापारियों के हाथ में लुट रहा है जो सस्ते अनाज ख़रीद कर बड़े व्यापारियों को देते हैं। वही देश भर में होगा तो क्या होगा?

रवीश कुमार ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा- संयुक्त किसान मोर्चा के नेता पटना गए थे कि बिहार के किसान भी आगे आएं और MSP की मांग करें। मंडियों के ख़त्म होने से बिहार में किसान संगठन भी ख़त्म हो गए। इसे जानने की ज़रूरत है कि पंजाब से 32 किसान संगठन आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं। पंजाब में इतने संगठन क्यों हैं और प्रभावशाली क्यों हैं? क्योंकि मंडी से ज़्यादा से ज़्यादा लाभ उठाने के लिए वे नियमित रूप से संघर्ष और दबाव की राजनीति करते हैं। बिहार में मंडी ख़त्म हुई तो किसानों के मोलभाव की शक्ति चली गई।

रवीश कुमार का यह पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट पर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ यूजर्स रवीश की बातों से सहमति जताते हुए लिख रहे हैं कि सरकार द्वारा किसानों का शोषण सिर्फ कुछ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। वहीं कुछ यूजर्स रवीश को उनके इस पोस्ट के लिए ट्रोल कर रहे हैं। ट्रोल करने वाले लिख रहे हैं कि 2006 से पहले बिहार के किसान बहुत अमीर थे क्या जो आप कह रहे हैं कि अब गरीब हो गए हैं।