बीते गुरुवार की शाम दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले करीब दो महीने बैठे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत मीडिया से बात करते हुए रोने लगे। रोते हुए उन्होंने कहा कि देश के किसान के साथ अत्याचार हो रहा है। केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मैंने खुद बीजेपी को वेट दिया था और आज वह हम लोगों के साथ ऐसा कर रही हैं।
राकेश टिकैत के रोने का वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बड़ी तादाद में लोग वीडियो को शेयर कर उसपर अपनी प्रतिक्रिया देने लेगे। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी इसपर अपनी टिप्पणी दी है। रवीश कुमार ने फेसबुक पर पोस्ट लिखते हुए पूछा कि राकेश टिकैत को क्यों रोना पड़ा और क्यों नाराज़ हुए किसान?
रवीश कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा – ‘हिंसा की घटना से किसान खुद शर्मिंदा थे। नेताओं की तरह सीना तान कर सही नहीं ठहरा रहे थे और न भाग रहे थे। बार बार कह रहे थे कि हिंसा ग़लत हुई। अगर किसानों का इरादा हिंसा का होता तो लाखों किसान थे। ज़्यादातर शांति से तय रूट पर गए और लौट गए। जिसने हिंसा की उसे लेकर कोई तरह के सवाल हैं। क्या ये किसी साज़िश का हिस्सा हैं? कभी पता नहीं चलेगा।
लेकिन इस घटना से जैसे सरकार को उग्र होने का मौक़ा मिल गया। धार्मिक संगठनों को आगे किया गया और फिर से गोली मारने के नारे लगे। किसानों को दमन का भय दिखाया गया। सरकार, गोदी मीडिया और पुलिस प्रशासन अति उग्र हो गए जबकि सरकार को हिंसा के बाद बात करनी चाहिए कि अभी हालात ठीक नहीं है। आप लोग वापस जाएं और फिर बात होगी लेकिन किसानों को गिद्ध और आतंकवादी कहा जाने लगा। जो लोग दिन रात हिंसा की राजनीति करते हैं वो हिंसा से शर्मिंदा किसानों को उपदेश दे रहे थे। जबकि बात कर माहौल ठंडा करना चाहिए था। मुमकिन था कि किसान लौट भी जाते और जाने भी लगे थे।
मगर गोदी मीडिया के ज़रिए लगातार हवा को गर्म किया गया। गोदी मीडिया से आप क्या नहीं करा सकते हैं। ये वो मीडिया है जो किसी को भी हत्यारा साबित कर दे। लोग जाने कब समझेंगे कि इसके कारण सीमा पर अपना बेटा भेजने वाला किसान अपने ही गांव में अपने ही देश में सफ़ाई दे रहा है कि वह आतंकवादी नहीं है। और गोदी मीडिया के असर से मिडिल क्लास चुप रहा। अजीब है। कम से कम ग़लत को ग़लत तो कहना चाहिए।
बहरहाल अब आगे क्या होगा? किसानों को पता है उनके पास एक ही चीज है। किसान होने की पहचान। वो ख़त्म हो गई तो वे उस धान के समान हो जाएँगे जिसका पूरा दाम नहीं मिलता है। हिंसा की आड़ लेकर किसानों पर हमला नहीं करना चाहिए था। वे खुद कह रहे थे कि जिसने हिंसा की है उससे नाता नहीं और उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए।’
रवीश कुमार का यह फेसबुक पोस्ट वायरल हो रहा है। यूजर्स कमेंट करते हुए लिख रहे हैं कि राकेश टिकैत के आंसुओं ने किसानों को फिर से एकजुट कर दिया है और आंदोलन को नई ऊर्जा मिल गई है। ऐसे यूजर्स सरकार की खूब आलोचना भी कर रहे हैं। वहीं कुछ यूजर्स रवीश कुमार की इश पोस्ट पर उन्हें और उनके साथ राकेश टिकैत को ट्रोल भी कर रहे हैं।

