कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से पहले इस मुद्दे पर विवाद जारी है। पार्टी अध्यक्ष के इलेक्शन को सलेक्श बताने वाले शहजाद पूनावाला एक डिबेट में अपने भाई तहसीन पूनावाला से भिड़ गए। दोनों ने इस मसले पर बेबाकी से अपने तर्क रखे। बातचीत के दौरान तहसीन ने यह तक कहा कि उनका शहजाद से कोई रिश्ता नहीं है। वे उनके भाई नहीं हैं। जबकि, जवाब में शहजाद ने कहा कि वह उन्हें भाई तो जरूर बोलेंगे। बता दें कि शहजाद पूनावाला महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव थे। उन्होंने राहुल की ताजपोशी से पहले पार्टी में वंशवाद पर सवालिया निशान लगाए थे। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाला चुनाव, सिर्फ दिखावा है। पूनावाला ने पार्टी अंदरखाने में वंशवाद का मसला उठाते हुए उसे गलत करार दिया था। शहजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। यही नहीं, उन्होंने राहुल को इस्तीफा देने के लिए भी कहा था, ताकि वह इस दौरान किसी तरह का लाभ न ले सकें।

गुरुवार को ‘इंडिया टुडे’ पर इसी मसले पर डिबेट हो रही थी। कार्यक्रम में शहजाद के अलावा उनके भाई तहसीन को भी बुलाया गया था। जबकि, शो में राहुल कंवल एंकर की भूमिका में थे। यह पूछे जाने पर कि राहुल को चुने जाने को लेकर फिक्सिंग हुई? उन्होंने कहा, “हां, अध्यक्ष पद के चुनाव में गुप्त बैलट रखा गया था, ताकि राहुल गांधी या किसी अन्य के लिए वोट डाले जा सकें। चुनाव सीक्रेट बैलट के जरिए होना था। लेकिन वह फिक्स था। दूसरी बात, मैंने वंशवाद पर पूछा कि एक सिद्धांत रखें। एक परिवार एक टिकट। इस सिद्धांत में क्या दिक्कत है?” एंकर इसके कांग्रेस में वंशवाद को सबसे बड़ी समस्या बताते हैं, जिसके आगे वह डिबेट में शहजाद के भाई और पॉलिटिकल ट्रेंड वॉचर तहसीन पूनावाला ने कहा, “मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं और मेरा परिवार शहजाद से अलग हो चुके हैं। हमारा उनसे कोई मतलब नहीं है। मैं शहजाद से सीधे बात नहीं करूंगा। मैं आपके जरिए अपनी बात कहूंगा।”

उन्होंने आगे बताया, “कांग्रेस पार्टी में या देश में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। कोई उसे काट नहीं सकता है। भाजपा में अमित शाह जी को चुनौती देने की जगह नहीं है। कांग्रेस इकलौती पार्टी है, जिसमें आपको यह प्लैटफॉर्म देती है। लेकिन उस प्लैटफॉर्म का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आपको एक प्रक्रिया के जरिए गुजरना पड़ता है। उसकी भी एक मर्यादा और फ्रेम वर्क होता है। आप सोशल मीडिया या राष्ट्रीय मीडिया पर आकर तमाशा नहीं कर सकते हैं। न ही ढेर सारे दावे पेश कर सकते हैं। चाहे जो भी आपकी शिकायतें हों। इस सब से निपटने के लिए एक प्रक्रिया होती है। आप ऐसे समय में ये सारी चीजें नहीं कर सकते, जब गुजरात में कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। ऐसे वक्त में जब कांग्रेस वहां पर नेतृत्व नहीं कर रही है। यह ऐसा वक्त है, जब वह भाजपा को टक्कर दे सकती है। आप क्यों इस सब से तनाव पैदा कर रहे हैं?”

शहजाद ने जवाब दिया, ” मैं इन्हें भाई तो बोलूंगा। यह कितना हैरान करने वाला है कि मेरे भाई और कांग्रेस ने यशवंत सिन्हा के भड़कने पर जश्न मनाया। जयंत सिन्हा से उसे अस्वीकार नहीं किया, यह अलग बात है। उन्होंने अरुण शौरी की बात पर जश्न मनाया। कोई शो कॉज जारी नहीं हुआ या भाजपा के किसी नेता ने नहीं कहा कि भाजपा हमारे नेता नहीं हैं। विश्वास नहीं होता कि महाराष्ट्र कांग्रेस से मुझे दो दिन पहले फोन आता है। कहा गया कि वहां से कुछ लोग अशोक चव्हाण जी से तिलक भवन दफ्तर में मिलने आने वाले हैं। अब वह कह रहे हैं कि मैं पार्टी का सदस्य नहीं हूं। मेरा मतलब है, यह मजाक है। दूसरा, क्या मेरा मुद्दा गलत है? मैं गलत हूं? मेरी टाइमिंग गलत है? क्या यह सही चीज कहने का गलत वक्त है? क्या मेरा कहना सैद्धांतिक तौर पर गलत है? क्या यह बात राहुल जी ने भी 3007 और 2013 में नहीं मानी है कि वह व्यवस्था को दुरुस्त करेंगे। क्या मैंने उसने समय नहीं मांगा है। मेरे पास सबूत हैं कि मैं उनसे ये बातें छह साल से कह रहा हूं। मैंने ई-मेल में भी ये मुद्दे उठाए हैं। अगर वे लीक हो जाती हैं, तो मैं क्या कर सकता हूं। मैंने कोई पार्टी प्रोटोकॉल नहीं तोड़ा है। मैं उनकी तरह नहीं हूं, जो 2014 में आम चुनाव के दौरान पार्टियां बदली थीं। मैं इसी पार्टी में ठहरा और मैं अपने मसले सुलझाने की कोशिशें कर रहा हूं।”

सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (फोटो-पीटीआई)

उधर, शहजाद के आरोपों पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने पार्टी के खिलाफ शहजाद के इन दावों को बेबुनियाद बताया था। उन्होंने कहा था कि शहजाद पार्टी में भी नहीं है। ढाई सालों से उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। अपनी पब्लिसिटी के लिए वह ये सब कर रहे हैं।