Original Ramcharitmanas Manuscript Video: सनातन धर्म के सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक ‘श्रीरामचरितमानस’ की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने संवत 1631 (1574 ईस्वी) में शुरू की थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके हाथों से लिखी गई इस महाकाव्य की मूल पांडुलिपि आज भी मौजूद है? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें श्रद्धालु तुलसीदास जी द्वारा हस्तलिखित रामचरितमानस के दुर्लभ दर्शन कर रहे हैं।
वीडियो देख मंत्रमुग्ध हुए इंटरनेट यूजर्स
तुलसीदास जी द्वारा हस्तलिखित रामचरितमानस की मूल प्रतियां अलग-अलग स्थानों पर होने का दावा किया जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख प्रति उत्तर प्रदेश के चित्रकूट (राजापुर) के एक मंदिर में सुरक्षित रखी गई है। बताया जाता है कि यहां ‘अयोध्या कांड’ की मूल प्रति आज भी संरक्षित है। इसके अलावा, कुछ अंश वाराणसी के ‘तुलसी घाट’ और अन्य संग्रहालयों में भी सुरक्षित रखे गए हैं।
वायरल वीडियो जिसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया है में दिखाया गया है कि कैसे प्राचीन कागज और स्याही से लिखी गई यह पांडुलिपि सदियां बीत जाने के बाद भी सुरक्षित है। अक्षरों की बनावट और लेखन की शैली देखकर लोग दंग हैं। वीडियो में दिखाया गया है कि एक महंत तिजोरी में रखी रामचरितमानस निकालते हैं और उस पर लेपेट हुए कपड़े एक एक करके हटाते हैं और पवित्र ग्रंथ की मूल प्रति दिखाते हैं।
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पवित्र ग्रंथ को देखने के बाद वहां मौजूद श्रद्धालु श्रद्धा से सिर झुकाते हैं और आशीर्वाद लेते हैं। अब पवित्र ग्रंथ के दर्शन का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसे यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं। हालांकि, जनसत्ता ऐसे किसी भी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
यहां देखें वायरल वीडियो –
एक यूजर ने लिखा, “इन पन्नों को देखना साक्षात तुलसीदास जी के आशीर्वाद के समान है।” दूसरे ने लिखा, “यह हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विरासत है।” तीसरे ने कहा, “जय सिया राम चन्द्र जी की जय।” वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “जय श्री राम। मैं पिछले वर्ष गया था कुम्भ के समय तब मिलकर के आया था, इनसे।”
बता दें कि इन पांडुलिपियों को कीड़ों और नमी से बचाने के लिए विशेष रसायनों और प्राचीन विधियों का उपयोग किया जाता है। कई बार इन्हें चोरी करने की भी कोशिशें हुईं, जिसके बाद अब इन्हें कड़ी सुरक्षा और कांच के बक्सों में रखा जाता है। केवल विशेष पर्वों या धार्मिक अवसरों पर ही इनके दर्शनों की अनुमति दी जाती है।
