केंद्र सरकार ने 19 अगस्त को नौकरियों के संबंध में एक घोषणा की। इसके मताबिक, अब केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए शुरुआती परीक्षा लेने का जिम्मा एक ही एजेंसी को दिया जाएगा। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी पहले उम्मीदवारों की स्क्रीनिंंग कर लेगी, फिर अलग-अलग विभागों की जरूरत के हिसाब से उनकी परीक्षा होगी। परीक्षा केंद्र भी जिलों में ही बनाए जाएंगे, ताकि छात्रों काे परीक्षा के लिए लंबी यात्राएं नहीं करनी पड़े। सरकार ने इसे बड़ा ऐलान बताया। लेकिन, पत्रकार रवीश कुमार ने इस पर सरकार सेे कई सवाल पूछे और लिखा कि पुरानी भर्तियों को पूरा करने का एलान बड़ा होता
रवीश ने फेसबुक पोस्ट में लिखा- एक पैटर्न दिखाई देता है। समस्या का समाधान मत करो। उस पर बात मत करो। एक समानांतर समाधान पेश करो। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी के ऐलान से अभी क्या बदला? क्या सरकार SSC CGL के नतीजे निकाल कर नियुक्ति पत्र देने जा रही है? क्या सरकार बताएगी कि लोकसभा चुनाव के समय लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की परीक्षा के रिजल्ट आए कितने महीने हो गए? क्या सरकार बताएगी कि सभी सफल अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग कब पूरी होगी? नहीं। इस पर कोई बयान नहीं देगा। इस वक्त जो परीक्षा देकर तड़प रहे हैं उनके लिए आज के एलान में कुछ नहीं है। रेलवे की ही नॉन टेक्निकल NTPC परीक्षा के फार्म भर कर छात्र कब से इंतज़ार कर रहे हैं। क्या इन छात्रों को बहलाने के लिए नई एजेंसी का एलान दिया गया है लेकिन उससे इन छात्रों की समस्या का समाधान कैसे होता है?
रवीश ने यह भी याद दिलाया कि कुछ हफ्ते पहले रेलवे ने कहा था कि एक साल तक नई भर्ती नहीं होगी। उस आदेश में यह भी था कि रेलवे के अधिकारी अपने विभागों में पता लगाएंगे कि कहां कहां नौकरियां कम हो सकती हैं। साथ ही पूछा- क्या उस ख़बर को रेल मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया था?
रवीश के इस पोस्ट को उनके पेज से 14 घंटों में करीब तीन हजार बार शेयर किया गया और 1800 लोगों ने इस पर कमेंट्स भी किए। इन कमेंट्स के जरिए जहां कुछ लोगों ने रवीश की तारीफ की, वहीं कुछ ने उन पर निशाना भी साधा।
कई लोगों ने कमेंट्स के जरिए समस्या के अलग-अलग पहलुओं पर भी ध्यान दिलाया। कुछ ऐसे ही कमेंट्स हम यहां जस के तस दे रहे हैं।
Kusum Dabhi ने लिखा- एग्जाम हर साल ली जाएगी, अगर उसकी फिस 500 रुपए रखी जाए और एक करोड़ भारतीय युवा एग्जाम के लिए ऑन लाइन आवेदन देगा तो गिनती कीजिए कितना बड़ा पैसा तिजोरी में जमा होगा!!!!!!! उसके सामने खरच उतना नहीं होगा। यह बहुत बड़ा इनकम करने का स्रोत बनेगा।
Jinendra Surana ने टिप्पणी की- रविश जी, ऐसा ही एकल भर्ती बोर्ड मध्यप्रदेश का कुख्यात “व्यापमं” था जो मेडिकल भर्ती से लेकर आरटीओ तक भर्ती करता था! उसमे जो घपले हुए उसे देखते हुए तो शक करना स्वाभाविक है कि ऐसी “एकल एजेंसी” कहीं “व्यापमं मॉडल” तो नही बनेगी? ऐसा नही होगा इस बात की क्या ग्यारंटी है?
सरकारी कर्मचारी Prem Kumar ने लिखा- देश में सब कुछ नया किया जा रहा है। चाहे शहर का नाम हो, मंत्रालय का नाम हो, विभागों का नाम हो, राहत कोष का नाम हो या अब भर्ती एजेंसी! एक बार अब पीएम का नाम भी नया हो जाता तो शायद कुछ उम्मीद की किरण दिखती!
Nityanand Kumar ने कमेंट किया- बिल्कुल sir आपने सही कहा है। एक साल हमलोगो का समय बर्बाद हो गया लेकिन कोई एक साल age relaxation नही देगा नौकरी में कोई प्रक्रिया करवाते 2 साल तक कि देरी लग जाती है और कइयों का समय बर्बाद। मात्र 6 महीने में अगर सभी प्रक्रिया सम्पूर्ण हो जाये तो इससे आने वाले बच्चों पे भार नही पड़ेगा। साथ ही हम इस वक़्त बहुत दुखी है एक तो ये सरकार किसी तरह की नौकरी नही देती और देती भी है तो उसमें भी देरी दूसरी ये महामारी जिसका जिम्मेदारी सरकार भी अपने कंधों पे नही लेगी आने वाले समय मे सरकार के पास बहाना हो जाएगा कि महामारी थी इसीलिए बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था खराब हुई थी। लेकिन इस सरकार ने हम लोगो को कहीं का नही छोड़ा खासकर युवाओं को जिन्हें अपने जीवन मे अपने स्तर को ठीक करना था।
Tarak Paswan ने निजीकरण की ओर ध्यान दिलाते हुए लिखा- सरकार की देश को भरमाने की एक और चाल हैं, न कोई भर्ती होंगी, न रोजगार बढ़ेगी। सारे संस्थाएं तो निजीकरण की जा रही हैं फिर नौकरी की परीक्षा किसके लिए होगी, दूसरी बात, प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना से क्या हासिल हुआ सबको पता है, मके इन इंडिया, खड़ा हो इंडिया, चलो इंडिया, दौड़ो इंडिया, सिर्फ मुंह से बात करो इंडिया, करेंगे कुछ नहीं इंडिया ।

