Google Trends: देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR 2025) अचानक राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी बहस बन गई है। घर-घर जाकर वोटर लिस्ट अपडेट करने (SIR Voter List Update) की इस कवायद को कई दल संदिग्ध मान रहे हैं तो चुनाव आयोग इसे “सबसे पारदर्शी प्रक्रिया” बता रहा है। इसी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग से जवाब मांगा है – और अब सबकी नजरें 2 दिसंबर की अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।
तमिलनाडु में सबसे बड़ा विरोध – वाइको की याचिका बहस का केंद्र
MDMK प्रमुख वाइको ने SIR प्रक्रिया को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राज्य के नागरिकों के मूल अधिकारों व कई कानूनी नियमों का उल्लंघन करती है। तमिलनाडु में उनके साथ DMK, CPI(M), अभिनेता विजय की पार्टी TVK, सांसद थोल थिरुमावलवन और विधायक सेल्वापेरुंथगई भी खुलकर विरोध कर चुके हैं। इसके ठीक उलट AIADMK ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का समर्थन किया है, जिससे राजनीतिक खींचतान और तेज हो गई है।
बंगाल, केरल और कांग्रेस भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके
SIR के खिलाफ विपक्षी मोर्चा केवल दक्षिण तक सीमित नहीं है। बंगाल कांग्रेस, TMC और केरल सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। कोर्ट ने 11 नवंबर को मद्रास और कलकत्ता हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगाकर साफ कर दिया कि अब अंतिम फैसला वही करेगा।
4 नवंबर से 7 फरवरी तक देश में सबसे बड़ी वोटर-लिस्ट एक्सरसाइज
चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से देश के 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया शुरू की – जहां 5.33 लाख BLO और 7 लाख से अधिक राजनीतिक दलों के BLA घर-घर जाकर वोटर लिस्ट को अपडेट कर रहे हैं। यह काम अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, यूपी, बंगाल और लक्षद्वीप में चल रहा है। कुल मिलाकर यह अभियान 51 करोड़ मतदाताओं से जुड़ा है – जो देश की आधी से ज्यादा वोटर आबादी है।
SIR में क्या होता है?—जिन्हें नहीं पता उनके लिए आसान भाषा में पूरा प्रोसेस
नए वोटर्स (18+) को जोड़ा जाता है। जिनकी मौत हो चुकी या जो स्थानांतरित हो चुके हैं, उनके नाम हटते हैं। गलतियां, दोहरे नाम और पते की गड़बड़ियां ठीक की जाती हैं। BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं, दस्तावेज लेते हैं और एंट्री करते हैं। इसका लक्ष्य है कि पात्र मतदाता छूटे नहीं और अपात्र व्यक्ति सूची में रहे नहीं।
AIADMK ने किया समर्थन, पलानीस्वामी ने कार्यकर्ताओं को दिया टारगेट
तमिनानडु के पूर्व मुख्यमंत्री व AIADMK महासचिव ई.के. पलानीस्वामी ने पार्टी नेताओं से कहा है- “फर्जी और दोहरे नाम हटवाइए, और वास्तविक मतदाताओं के अधिकार की रक्षा कीजिए।” उन्होंने 2026 विधानसभा चुनावों की तैयारी में SIR को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी संगठन और IT विंग को इस प्रक्रिया पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
बंगाल में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को BJP आयोग बताया
बोंगांव में आयोजित एक रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि “चुनाव आयोग अब BJP का आयोग बन गया है।” उन्होंने कहा कि AI जैसी तकनीक का इस्तेमाल वोटर-लिस्ट में हेराफेरी के लिए किया जाएगा। मतुआ बहुल इलाकों में कई वोटरों को ‘विदेशी’ बताकर सूची से हटाने की साजिश चल रही है।” ममता बनर्जी ने कहा कि यदि यह प्रक्रिया दो-तीन साल में की जाए तो वे सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले “अचानक जल्दबाजी” क्यों?
अगर SIR दो-तीन वर्षों में किया जाए तो हर संभव मदद देंगे: ममता बनर्जी
